जल निगम की भर्तियों में धांधली पर फिलहाल पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां की गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है। प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में गुरुवार को अपना जवाब दाखिल कर यह बात कही।
बता दें कि एसआईटी द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर के बाद अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगवाने के लिए आजम ने याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका निस्तारित करते हुए कहा, एसआईटी अपनी जांच जारी रखे और आजम इसमें पूरा सहयोग करें।
याचिका पर पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि जांच के दौरान गिरफ्तारी की जाती है या नहीं? जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस रजनीश कुमार के समक्ष प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता वीके शाही ने बताया कि एसआईटी की जांच के दौरान गिरफ्तारी नहीं की जाती है।
एसआईटी अपनी जांच पूरी करने के बाद सरकार को रिपोर्ट देती है। इस पर प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में डीआईजी व संबंधित विभाग के मुखिया मिलकर समिति बनाते हैं। यह समिति ही रिपोर्ट पर निर्णय करती है। अगर समिति को लगता है कि सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अभियोजन चलाना है तो इसकी स्वीकृति दी जाती
है। अगर आरोपी गैर-सरकारी कर्मचारी है तो गिरफ्तारी पर निर्णय किया जाता है। आजम के मामले में भी इसी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्यवाही की जाएगी। इस पर हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा, फिलहाल एसआईटी अपनी जांच जारी रखे।