मेयरों को हटाने संबंधी विधेयक को रोके रखने से नाराज नगर विकास मंत्री मो. आजम खां ने बुधवार को विधानसभा में राज्यपाल को अपनी मर्यादाओं का खयाल रखने की नसीहत दे डाली।
कहा-राज्यपाल को ध्यान रखना होगा कि वे राजभवन में रहते हैं या राजनीतिक भवन में। पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी व श्रम मंत्री शाहिद मंजूर भी आजम के सुर में सुर मिलाते नजर आए।
शून्य प्रहर में आजम ने राज्यपाल द्वारा रोके गए उ.प्र. नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2015 का मामला उठाते हुए कहा कि यह दोनों सदनों से पारित हो चुका है। राज्यपाल इसे मंजूरी नहीं दे रहे हैं। यह बिल जौहर विश्वविद्यालय का नहीं, बल्कि लोक महत्व का है।
इस तरह के बिल रोकने से राजभवन की छवि और राज्यपाल के निष्पक्ष आचरण पर अंगुली उठती है। अगर राज्यपाल उनसे नाराज हैं तो इसका असर जनहित के काम पर नहीं पड़ना चाहिए। अगर बिल में कोई कमी है तो नोट लगाकर वापस करें।
भाजपा के सुरेश खन्ना ने यह कहते हुए विरोध किया कि यह परंपरा है कि सदन में राज्यपाल का कोई मामला नहीं उठाया जा सकता है और न ही चर्चा हो सकती है।
इस पर अंबिका चौधरी ने कहा कि यह सही है कि सदन नियमों व परंपराओं से चलता है। लोकतंत्र भी लोक-लाज से चलता है। राज्यपाल को अपनी मर्यादा का खयाल रखना चाहिए क्योंकि वे मर्यादा वाली जगह पर बैठे हैं।
आजम की चुटकी, भाजपाइयों आपके लिए काम कर रहा हूं
भाजपा के सदस्यों ने अंबिका की टिप्पणी को कार्यवाही से निकालने की मांग करते हुए शोर-शराबा शुरू कर दिया तो आजम ने कहा कि भाजपा के नेता ने जो बात कही है, उसका भी मतलब है। महामहिम व राजभवन पर प्रतिकूल टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने तो केवल अपनी पीड़ा रखी। कब कहा कि वे अयोध्या के बारे में क्या कहते हैं?
इस पर भाजपा के सदस्य फिर खड़े हो गए और शोर-शराबा करने लगे। आजम ने कहा कि राज्यपाल को अपनी मर्यादाओं का खयाल रखते हुए तय करना होगा कि वे राजभवन में रहते हैं या राजनीतिक भवन में।
उन्हें राजभवन में रहना है तो वैसा ही व्यवहार करना होगा और राजनीतिक भवन में रहना है तो यहां आना होगा। आजम ने चुटकी लेते हुए कहा कि जो परेशानियां हमें हो रही हैं, वे आगे चलकर आपको (भाजपा) न हों, इसलिए समस्या दूर करने का प्रयास कर रहे हैं।
राज्यपाल को भगवा कपड़े न पहनाओ
भाजपा के सदस्य राज्यपाल को लेकर की गई टिप्पणियों को कार्यवाही से निकालने की लगातार मांग कर रहे थे। अध्यक्ष ने कहा कि वे देखेंगे और अगर कुछ नियम विरुद्ध होगा तो निकाल देंगे।
इसी बीच शाहिद मंजूर खड़े हो गए और बोले कि भाजपा समझती है कि वे केवल हमारे गवर्नर हैं जबकि गवर्नर तो सबके हैं। आजम ने भी उनका समर्थन करते हुए कहा कि राज्यपाल सबके हैं। उन्हें भगवा कपड़े न पहनाओ। भाजपा को इस पर विचार करना चाहिए।
...तो कैसे नहीं होगा राज्यपाल का जिक्र
मामला शांत होने के बाद कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की बारी आई तो भाजपा के सतीश महाना ने लोकायुक्त विवाद को लेकर अपने प्रस्ताव पर बल देना शुरू किया।
इस पर आजम ने फिर चुटकी लेते हुए कहा कि महाना जी सीनियर सदस्य हैं। चाहते हैं कि सदन में राज्यपाल का जिक्र न हो। लोकायुक्त के मामले में वे कैसे अड़ंगे लगा रहे हैं। जब लोकायुक्त का मामला आएगा तो कैसे जिक्र नहीं होगा?