एसआईटी इस मामले में आजम खां समेत 10 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें जल निगम बोर्ड के एमडी पीके आशुदानी, आजम के ओएसडी रहे सैयद अफाक अहमद, नगर विकास विभाग के पूर्व सचिव एसपी सिंह शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि अभी और 10 लोगों से पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही शासन को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जिनसे से पूछताछ होनी है, उसमें ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली एजेंसी के मालिकों, परीक्षा बोर्ड और इंटरव्यू बोर्ड में शामिल लोग शामिल हो सकते हैं।
क्या है पूरा मामला
वर्ष 2016 में हुई जल निगम में 122 सहायक अभियंता, 853 अवर अभियंता, 335 नैतिक लिपिक और 32 आशुलिपिक की भर्ती हुई थी। इस मामले में कुछ विभागीय अधिकारियों ने अनियमितता की शिकायत की थी। इस पर योगी सरकार ने सभी 122 सहायक अभियंताओं को बर्खास्त कर दिया। साथ ही इसकी जांच एसआईटी को सौंप दी। जांच मिलते ही एसआईटी 22 सितंबर 2017 को जल निगम बोर्ड के मुख्यालय पर छापा मारकर तमाम दस्तावेज कब्जे में लिए थे। भर्ती के दौरान आजम खां इस विभाग के मंत्री व जलनिगम बोर्ड के चेयरमैन थे।
सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे आजम खां सोमवार को एसआईटी के सामने पेश हुए। उन्होंने वर्ष 2016 में जल निगम में 1300 पदों पर हुई भर्तियों में गड़बड़ी मामले में बयान दर्ज कराया। इससे पहले आजम ने कहा कि सरकार ने मेरा नाम चोरों की लिस्ट में तो ला ही दिया है। मेरा जुर्म क्या है, इतना तो ये बताएंगे ही। उसी जुर्म में सफाई देने आया हूं। आजम के साथ उनके विभाग के पूर्व सचिव एसपी सिंह भी मौजूद थे।
एसआईटी के एसपी नागेश्वर सिंह ने बताया कि जल निगम में भर्ती में हुई अनियमितता की जांच एसआईटी को सौंपी गई है। इस मामले में अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। सिर्फ शिकायत आई है, इसकी प्रारंभिक जांच की जा रही है। इसमें आजम खां पर आरोप लगाए गए हैं कि उनके प्रभाव व दबाव में ये भर्तियां की गई हैं।
इसी मुद्दे पर आजम खां को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। एसपी ने बताया कि शिकायत में रिश्वत लेन-देन की बात नहीं कही गई है और न ही अब तक जिन लोगों के बयान लिए गए हैं, उसमें रिश्वत की बात सामने आई है।