संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने कहा है कि अब लोग लोकतंत्र से ऊबते जा रहे हैं। पूरी दुनिया में इसके खिलाफ माहौल बन रहा है। सत्ता के लालच ने इंसानियत को कमजोर कर दिया है।
सरकारें कानून व्यवस्था से नहीं, जज्बाती नारों से आती-जाती हैं। आजम खां बृहस्पतिवार को विधानसभा में विपक्षी दलों द्वारा कानून व्यवस्था पर लाए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, लेकिन वोटों के लालच में यहां इंसानियत पर आदमियत हावी होने लगी है व सहनशीलता में कमी आई है। पहले पंचायतों में बुजुर्ग मामलों को निपटा लेते थे, लेकिन अब उनकी मानने को लोग तैयार नहीं है।
सरकारें भी कानून व्यवस्था पर नहीं बनती, जज्बाती नारों पर आती और चली जाती हैं। मौजूदा (सपा) सरकार ने आम आदमी की भलाई के लिए बहुत काम किया है, लेकिन बहस होती है कि हम फिर सरकार बनाएंगे या नहीं।
भाजपाइयों के 'आदर्श' का दोहरा चरित्र हुआ उजागर
उन्होंने कहा कि औलाद, रोजी और भविष्य आसमान वाला बनाता है। यदि ऐसा न होता तो मोदी प्रधानमंत्री न बनते व सेना का जवान बर्फ से जिंदा न निकलता। कुदरत कुछ करिश्मे दिखाती है।
यदि हम आपस में अच्छे रिश्ते रखें तो कानून व्यवस्था पर बहस की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। सरकार कोई भी बनाए, सही को सही व गलत को गलत कहना होगा। गुमान के आधार पर किसी को सजा नहीं दे सकते।
दुबई के शहजादे के लिए प्रोटोकॉल तोड़ना गलत
आजम खां ने भाजपा नेताओं की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आप जिसे आदर्श मानते हैं, उनका दोहरा चरित्र उजागर हो गया है।
दुबई के अदरूनी हालात तो बेरूत जैसे होते जा रहे हैं। वहां के शहजादे के लिए प्रधानमंत्री का प्रोटोकॉल तोड़ना गलत था। अभी तो यह भी पता नहीं वह शहजादा बादशाह बनेगा या नहीं।
पीएम को कुछ हो जाता तो यहां कत्लेआम हो जाता
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से लौटते वक्त पीएम का बिना कार्यक्रम पाकिस्तान जाना भी गलत था। वहां कुछ इलाकों में नौ साल का बालक तक राकेट से हवाई जहाज गिरा देता है। जिस मुल्क में पीएम गए वहां के आतंकियों को छोड़ने के लिए भारत सरकार के वजीर को कंधार तक जाना पड़ा था। प्रधानमंत्री को कुछ हो जाता तो यहां कत्लेआम हो जाता।
जौहर यूनिवर्सिटी में 80 पैसा हिंदू भाइयों का
आजम खां ने कहा कि हमारे बारे में कितना बुरा कहा जाता है। हमने जो मो. अली जौहर विश्वविद्यालय बनाया है, वह हिंदू दोस्तों के पैसे से बना है।
मुसलमानों का सहयोग तो 20 फीसदी भी नहीं रहा होगा। एक अनोखी मिसाल और बन रही है। दस बड़ी मस्जिदों में शुमार होने वाली मस्जिद में 80 फीसदी सहयोग हिंदू दोस्तों का है।