आमतौर पर तीखे और कटाक्ष बालों के लिए जाने जाने वाले आजम खां कभी कभी हल्के फुल्के मूड में भी होते हैं। बजट सत्र के समापन से पहले विधानसभा में हल्के-फुल्के क्षण भी आए। कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर ने भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुरेश खन्ना का विवाह कराने की बात उठाई।
संसदीय कार्यमंत्री ने कहा-खन्नाजी से शादी की हां कराइए, दुल्हन मैं तलाशूंगा, शादी का सारा खर्च भी उठाऊंगा। माथुर ने कहा, उनकी बढ़िया शादी कराई जाएगी। मेरी ससुराल शाहजहांपुर में है, इस नाते खन्ना मेरे साले भी लगते हैं। इस पर कुछ सदस्य ने कहा, शादी तय कराएं, पांच-पांच हजार चंदा कर लेंगे।
माथुर ने रालोद विधानमंडल के नेता दलबीर सिंह को सदन के ताऊ की उपाधि देने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, दलबीर सिंह 403 विधायकों की बात उठाते हैं। जनहित की बात करते हैं। इसके बाद दलबीर का मौका आया तो उन्होंने कहा-ताऊ नहीं, मेरी उम्र तो बाबा की हो गई है। फिर भी मुझे ताऊ बताया, इसके लिए धन्यवाद।
फल अच्छा तो पेड़ खराब कैसे : खन्ना
आजम खां ने सुरेश खन्ना की ओर मुखातिब होते हुए कहा, आप अच्छे इंसान और अच्छे दोस्त हैं लेकिन खराब पार्टी में हैं। आप कातिलों की पार्टी में होते हुए भी मुसलमानों के वोट ले लेते हैं। लोग मानते हैं कि कातिल आप नहीं, भाजपा है। इसके जवाब में खन्ना ने कहा, जब फल अच्छा है तो पेड़ खराब कैसे हो सकता है।
दलबीर सिंह ने कहा कि तीन साल में सीएम अखिलेश यादव को सदन में केवल एक बार कड़वा शब्द बोलते सुना है। सीएम ने भाजपा का चालू पार्टी कहा था। दलबीर ने आजम खां की हाजिर जवाबी की तारीफ करते हुए कहा कि वे देश के अव्वल संसदीय कार्यमंत्री हैं।
सुरेश खन्ना ने कहा कि वे मुख्यमंत्री की सदाशयता की तारीफ सुनते रहे हैं। व्यक्तिगत काम से वे कभी मुख्यमंत्री से नहीं मिले। 11 साल बाद एक बार विधायकों के साथ सीएम से मिलने एनेक्सी गया भी, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।
नए विधायकों को फ्लैट दिलवा दें
दलबीर सिंह ने कहा कि इस सदन में बहुत सारे नए विधायक हैं। कुछ की शादी दो-चार साल पहले हुई है। पुराने विधायकों को फ्लैट या प्लॉट मिल चुके हैं। सीएम नए विधायकों को फ्लैट या प्लॉट जरूर दिलाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने के अलावा उन्हें पाइप वाटर सप्लाई और हैंडपंप भी दिए जाएंगे। लोहिया गांवों में भी उन्हें बराबर की हिस्सेदारी मिलेगी। विद्युतीकरण के लिए गांव देने पर भी विचार करेंगे।
सत्र स्थगित करने से पहले विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वे सदन में कभी-कभी जोर से जरूर बोलते हैं, लेकिन किसी सदस्य के प्रति उनके मन में द्वेष भावना नहीं रहती। 404 विधायक हैं। सभी अपने क्षेत्र की समस्याएं उठाना चाहते हैं लेकिन उनकी समस्या है कि सदन कैसे व्यवस्थित चले।
विधान परिषद में बृहस्पतिवार को बसपा के अशोक सिंह ने सुल्तानपुर और अमेठी के जिलाधिकारियों द्वारा पत्रों का जवाब न देने का मामला उठाया। विशेषाधिकार हनन की सूचना के जरिये यह मामला उठाते हुए सिंह ने कहा कि एक तो जवाब ही नहीं दिया जाता। और दिया भी जाता है तो भ्रामक और त्रुटिपूर्ण।
उन्होंने उदाहरण दिया कि उनकी तरफ से 20 दिसंबर, 21 जनवरी, 21 फरवरी को पत्र भेजे गए, पर जवाब नहीं मिला। 21 फरवरी को जो पत्र उन्होंने भेजा, उसी विषय से संबंधित पत्र नवंबर में भी भेजा गया था, पर जवाब नहीं मिला। उन्होंने अधिकारियों द्वारा जवाब न देने व गलत देने पर विशेषाधिकार हनन की सूचना दी। सभापति गणेश शंकर पांडेय ने नेता सदन अहमद हसन को जांच कराकर सदन को अवगत कराने का निर्देश दिया।