मदरसों में ड्रेस लागू करने की योजना का मुस्लिम धर्म गुरुओं ने विरोध किया है। बुधवार को मदरसा दारुल उलूम फिरंगी महली ने कहा कि मदरसों में मुश्किल से एक या दो प्रतिशत मुस्लिम बच्चे ही शिक्षा लेते हैं। सरकार को उनके लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनके लिए क्या बेहतर है, और क्या नहीं, यह हम पर छोड़ दें।
वहीं सूफी निजाम ने मदरसों के पारंपरिक पहनावे पर सरकार द्वारा छेड़छाड का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि देश भर में चल रहे कॉलेजों और स्कूलों में ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार संस्था की प्रबंध समिति को होता है, फिर मदरसों के साथ यह भेदभाव क्यों?
गौरतलब है कि मंगलवार को मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने मदरसों में ड्रेस कोड लागू करने का एलान किया था। मोहसिन रजा की इस घोषणा के बाद मुस्लिम धर्म गुरुओं और नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
वहीं सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि सरकार ड्रेस कोड लागू करने के साथ पालन न करने पर मिलने वाली सजा भी बता दे। आजम खां यहीं नहीं रुके, सरकार पर व्यंग करते हुए कहा कि हो सकता है, सरकार आदेश का पालन न करने वाले मदरसों पर बुल्डोजर चलवा दे या शिक्षकों पर तेजाब डलवा दे।