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नए साल में भी नहीं बदले आजम के तेवर

Thu, 02 Jan 2014 09:53 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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नए साल के पहले दिन अधिकतर अफसर जहां एक-दूसरे को बधाई देकर खुशी का इजहार कर रहे थे, वहीं कुछ अफसरों को नगर विकास मंत्री मो. आजम खां की फटकार सुननी पड़ी।
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आजम ने बुधवार को राजीव आवास योजना की समीक्षा के लिए अधिकारियों को बुलाया था।

अधिकारियों ने इस योजना में तीसरे चरण के मकान बनाने का प्रस्ताव रखा तो वह भड़क उठे। कहा कि अफसरों की लापरवाही से सरकार की छवि खराब हो रही है।

अफसर केवल फाइलों पर आपत्तियां लगाते रहते हैं, इससे काम नहीं चलेगा, योजनाएं जमीन पर दिखनी चाहिए। उनकी नाराजगी का आलम यह रहा कि उन्होंने तीसरे चरण के प्रस्ताव को मंजूरी देने से मना कर दिया।

केंद्रीय सहायता से राजीव आवास योजना में मलिन बस्तियों में रहने वालों को पक्के मकान बनाकर देने हैं।

इस योजना के पहले चरण में रामपुर, रायबरेली, लखनऊ, आगरा, कानपुर नगर व कन्नौज शहर की मलिन बस्तियों में 3168.17 लाख रुपये की लागत से 2584 मकान बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार मंजूर कर चुकी है।
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दूसरे चरण में मथुरा, मुजफ्फरनगर, फीरोजाबाद, मुरादाबाद, वाराणसी, मेरठ व इटावा में 25438.94 लाख की लागत से 3781 मकान बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है। इनमें से मात्र रायबरेली में अभी काम शुरू हो पाया है।

आजम ने इन मकानों के निर्माण के प्रगति की समीक्षा के लिए बुधवार को अधिकारियों को बुलाया था। बैठक में सचिव नगर विकास अनीता सी मेश्राम और विशेष सचिव नगर विकास श्रीप्रकाश सिंह नहीं पहुंचे।

प्रमुख सचिव नगर विकास सीबी पालीवाल के अलावा सूडा के निदेशक रविंद्र नायक व अन्य अधिकारी आए थे। बैठक शुरू होते ही आजम ने राजीव आवासों के निर्माण की प्रगति पूछी।

अफसरों ने जैसे ही बताया कि केवल रायबरेली में काम शुरू हुआ है, वे भड़क गए। कहा कि इस असंतोषजनक हालात के लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार हैं।

अधिकारियों ने जरा भी दिलचस्पी ली होती तो ये मकान जमीन पर बनते हुए नजर आते। बड़े अफसोस की बात है कि पिछले कुछ वर्षों से चल रही यह योजना अब भी कागजों तक ही सीमित है और विभिन्न विभागों के मकड़जाल में उलझकर रह गई है।

तीसरे चरण में इन शहरों का था प्रस्ताव
राजीव गांधी आवास योजना के तीसरे चरण में गाजियाबाद, झांसी, अलीगढ़, बरेली, गोरखपुर, शाहजहांपुर, इलाहाबाद तथा सहारनपुर में 25171 लाख की लागत से 4390 मकान बनाने का प्रस्ताव था।
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आजम ने इसे मंजूरी देने से मना करते हुए कहा कि भविष्य में जब भी प्रस्ताव दिया जाए तो उसमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड के जिलों को जरूर शामिल किया जाए।
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