गाजियाबाद हज हाउस पर वित्त विभाग की टिप्पणियों से गुस्साए आजम खां की चिट्ठी का असर गुरुवार को सरकारी मशीनरी पर दिखा।
सुबह से ही अल्पसंख्यक विभाग से लेकर वित्त विभाग तक में इस मामले के दस्तावेज खोजे जाने लगे।
शाम को मुख्य सचिव ने भी संबंधित विभागों के अधिकारियों को तलब कर पूरे मामले की पड़ताल की। उन्होंने अधिकारियों से इस मामले को जल्दी हल करने को कहा है।
आजम ने बुधवार को गाजियाबाद हज हाउस में वित्त विभाग की आपत्तियों पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव को एक कड़ा पत्र लिखा था।
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इसी पत्र के बाद गुरुवार सुबह से ही संबंधित विभागों में हलचल रही। अल्पसंख्यक विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी ने भी पूरे मामले की फाइल तलब की।
हज समिति के ऑफिस से लेकर निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण से भी मामले की पूछताछ की गई।
वित्त विभाग के अधिकारियों ने भी इस मसले पर एक बैठक की। प्रमुख सचिव वित्त आनंद मिश्र ने भी वित्त विभाग के अधिकारियों को बुलाकार पत्रावलियों में देखा कि उन लोगों ने जो-जो आपत्तियां लगाई हैं, वे नियमों के अनुसार हैं या नहीं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जो आपत्तियां लगाई हैं वे प्रावधानों के अनुसार ही हैं। वित्त विभाग की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि गाजियाबाद हज हाउस के लिए रिलीज पैसा लखनऊ हज हाउस में क्यों लगा दिया गया?
वहीं, मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने अधिकारियों को बुलाकर इस मामले का हल निकालने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि जो भी प्रक्रियात्मक त्रुटियां हैं उन्हें दूर किया जाए।
अब तक सात करोड़ से अधिक खर्च
गाजियाबाद हज हाउस में अब तक सात करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इनमें से चार करोड़ सरकार से दो किश्तों में मिले हैं।
तीन करोड़ हज समिति ने अपने संसाधनों से दिए हैं। इसमें चारदीवारी, प्रशासनिक भवन, शौचालय के अलावा नए भवन की नींव भरकर उसका बेस तैयार हो गया है।
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कार्यदायी संस्था ने जब और पैसे मांगे तो हज समिति ने सरकार से इसके लिए बजट में प्रावधानित 10.80 करोड़ रुपये से कुछ जारी करने के लिए कहा, लेकिन वित्त विभाग ने पुराने जारी किए पैसों के खर्च पर कई आपत्तियां लगा दी हैं।