शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद को सरकार का समर्थन मिलने से नाराज चल रहे अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. आजम खां अपने जिले के चर्चित एआरटीओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह के निलंबन के कारण और भी ज्यादा खफा बताए जा रहे हैं।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि कल्बे जव्वाद और अमर सिंह की सपा नेतृत्व से बढ़ती नजदीकियों को लेकर खां अपने शुभचिंतकों से विचार-विमर्श में जुट गए हैं।
सोमवार को सचिवालय के एनेक्सी से लेकर विधानभवन और बापूभवन तक आजम खां की नाराजगी चर्चा का विषय रही।
जया प्रदा के वाहन से उतारी लालबत्ती
इसके मुताबिक शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद को सरकार का खुला समर्थन मिलने से नाराज चल रहे आजम रामपुर के एआरटीओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह के निलंबन से और भी ज्यादा खफा हो गए हैं।
बताया जाता है कि कौशलेंद्र ने ही रामपुर की तत्कालीन सांसद जयाप्रदा के वाहन से लालबत्ती उतारी थी। तब जयाप्रदा ने आरोप लगाया था कि कौशलेंद्र ने आजम खां के निर्देश पर यह कार्रवाई की थी।
इधर जनेश्वर मिश्र पार्क के उद्घाटन मौके पर अमर सिंह ने सपा मुखिया व मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा किया तो आजम उस समारोह में शामिल नहीं हुए।
इस कार्यक्रम के अगले ही दिन रामपुर में एक पिकप वाहन में एक टैंकर की टक्कर से बच्चों की मौत मामले में कौशलेंद्र को निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई को सरकार की ओर से आजम को एक और संदेश देने के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
किया नाराजगी का इजहार
चर्चा है कि बच्चों की मौत की वजह से आजम खुलकर कौशलेंद्र के पक्ष में अपनी नाराजगी नहीं जता पा रहे हैं, पर अपनों के बीच उन्होंने इस नाराजगी का इजहार कर दिया है।
आजम के करीबी यहां तक चर्चा करते घूम रहे हैं कि यदि कल्बे जव्वाद व कौशलेंद्र के प्रकरण में सरकार ने अपना स्टैंड नहीं बदला तो आजम कड़े कदम भी उठा सकते हैं।
कौम के सम्मान व प्रतिष्ठा के सामने उनके लिए कुर्सी कोई मायने नहीं रखती। आजम इस्तीफा हमेशा अपनी जेब में रखते हैं। फिलहाल वे कुछ दिन सरकार के स्टैंड का इंतजार करेंगे।