नगर विकास एवं संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने अभद्र व्यवहार का आरोप लगाकर उनके साथ काम करने से इन्कार करने वाले दो निजी व पांच अपर निजी सचिवों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव सचिवालय प्रशासन अरविंद नारायण मिश्र पर दबाव बढ़ा दिया है।
आजम ने मिश्र पर कर्मचारियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई न कर मौन साधने का आरोप लगाते हुए स्पष्टीकरण भी तलब कर लिया है। उन्होंने पत्र में अपने बागी स्टाफ को भगोड़े के रूप में संबोधित किया है।
बताते चलें कि गत 28 अक्तूबर को आजम के सात निजी व अपर निजी सचिवों ने उन पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए उनके साथ काम करने से इन्कार कर दिया था और अपनी तैनाती केंद्रीय अनुभाग में दे दी थी।
बाद में सचिव सचिवालय प्रशासन ने इन कर्मचारियों को चार्जशीट देते हुए मामले की जांच प्रमुख सचिव गन्ना को सौंप दी थी।
तब से तीन महीने से अधिक बीत गए, लेकिन सचिवालय प्रशासन अब तक न तो आजम को नया स्टाफ दे पाया और न ही वहां से बागी हुए कर्मचारियों के बारे में ही कोई फैसला कर पाया।
तभी से आजम खां राज्य हज समिति में कार्यरत हज अधिकारी तनवीर अहमद सिद्दीकी से कार्यवाहक निजी सचिव के रूप में काम ले रहे हैं।
आजम ने प्रमुख सचिव से कहा है कि कर्मचारी जिस तरह उनकी गैरमौजूदगी में उनके कार्यालय के सारे अभिलेखों व फाइलों को लावारिस हाल में छोड़कर चले गए, उससे साफ है कि उन्होंने कर्मचारी सेवा नियमावली का कड़ा उल्लंघन किया है।
संगीन आरोप
आजम ने कहा है कि जिस प्रकार की उदासीनता भगोड़े कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और मेरे कार्यालय में नया स्टाफ तैनात करने में सचिवालय प्रशासन द्वारा अपनाई गई, उससे प्रतीत हो रहा है कि सरकार के पूरे कार्यकाल तक यही स्थिति बनी रहेगी और आपके द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
आजम के साथ काम करने को तैयार नहीं कोई
सचिवालय प्रशासन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि संसदीय कार्यमंत्री के कार्यालय से स्टाफ के बगावत करने के बाद सचिवालय प्रशासन विभाग ने नए स्टाफ की तैनाती के लिए काफी प्रयास किए थे।
कई कर्मचारियों को बुलाकर बात भी की गई थी, मगर तब सचिवालय का कोई भी निजी सचिव व अपर निजी सचिव उनके साथ काम करने को तैयार नहीं हुआ।