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अल्पसंख्यक अधिकार शब्द छलावा: आजम

Wed, 18 Dec 2013 10:59 AM IST
राजेंद्र सिंह/लखनऊ
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प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां अल्पसंख्यक अधिकार शब्द को छलावा मानते हैं।
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वह कहते हैं, सिर्फ कहने से अल्पसंख्यकों को अधिकार नहीं मिलेंगे।

सच्चर कमेटी ने मुसलमानों की शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति दलितों से भी बदतर बताई थी। इसे दूर करने में कामयाब नहीं रहे तो अल्पसंख्यक कल्याण छलावा ही रहेगा।

‘अमर उजाला’ से बातचीत में आजम ने कहा, सच्चर कमेटी प्रधानमंत्री ने बनाई थी। रिपोर्ट आए सात साल से ज्यादा हो गया।

पढ़ें खास ख्ाबर: सफरनामा 2013: यूपी में 5 फैसलों ने दिया झटका

मुसलमानों की हालत में एक भी बुनियादी बदलाव नहीं आया। उन्हें दलितों से ज्यादा रिजर्वेशन की जरूरत थी लेकिन नहीं मिला।

यूपी में तो आलम यह था कि अल्पसंख्यकों की योजनाएं पांच साल में एक से दूसरी टेबल पर पहुंचती थी।

बसपा शासन में भारत सरकार से फंड की दूसरी किस्त इसलिए नहीं मिली कि पहली किस्त में दिया गया धन खर्च ही नहीं हो सका। अब गेंद बल्ले पर है।

स्कूलों, मदरसों समेत सभी योजनाओं में शत-प्रतिशत धन खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा, प्रदेश में अल्पसंख्यक कल्याण की सरकारी योजनाओं की प्रगति से वह संतुष्ट हैं। अब कहीं फर्जीवाड़ा नहीं हो रहा, सभी योजनाएं पारदर्शिता से लागू हो रही हैं।
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विभाग को मिले खर्च का अधिकार
आजम कहते हैं कि जिन विभागों के 20 प्रतिशत विकास कार्य अल्पसंख्यक इलाकों में करने का फैसला किया गया था, उनके धन को खर्च करने का अधिकार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को मिलना चाहिए। तभी बेहतर नतीजे आएंगे। फाइल चल रही है, हो सकता है उनका यह सुझाव मान लिया जाए।

जब तक सक्षम लोग नहीं मिलते, काम नहीं लेता
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में निदेशक और अन्य पदों पर नियुक्तियां न होने के सवाल पर आजम ने कहा, यह बात सही है।

मेरी मजबूरी है कि जब तक सक्षम आदमी नहीं मिलता, तब तक नियुक्ति नहीं करता। मदरसा बोर्ड, वक्फ विकास निगम, अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम में नियुक्तियां कर दी गई हैं।

बसपा ने आयोग का स्वरूप बिगाड़ा
आजम ने कहा, अल्पसंख्यक आयोग संशोधन विधेयक कुछ दिन पहले ही विधानसभा से पास हुआ है। गवर्नर के पास गया हुआ है।

बसपा ने अल्पसंख्यक आयोग का स्वरूप ऐसा बना दिया था कि इसे अल्पसंख्यक कहना मुनासिब नहीं था। गवर्नर के यहां से विधेयक आते ही अल्पसंख्यक आयोग में नियुक्तियां कर दी जाएंगी।

मुजफ्फरनगर दंगा पर बोले
अब कहने के लिए क्या है? भाजपा ने हथियार लहराने वालों, दंगाइयों को सम्मानित करके साबित कर दिया कि उसने दंगा कराया। वहां जो कुछ हुआ उसके पीछे फासिस्ट ताकतें हैं।
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आजम ने कहा, दंगा पीड़ितों के राहत शिविरों में मौत पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। इस मुद्दे पर बहस में इसलिए भी नहीं पड़ूंगा कि मैं वहां जा नहीं सका।

मेरे जाने पर पता नहीं क्या माहौल बने, कितने गरीबों पर जुल्म हो। मेरे जाए बगैर ही इतना हंगामा बरपा दिया गया। मेरे फरिश्तों को पता नहीं और एक टीवी चैनल ने मेरे किरदार पर ही सवाल उठा दिया।
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