भले ही अखिलेश यादव ने संसदीय कार्यमंत्री आजम खां के घर जाकर उन्हें मनाया हो लेकिन ऐसा लग रहा है कि आजम का गुस्सा अभी उतरा नहीं है।
रविवार को हुई विधानमंडल सत्र की सर्वदलीय बैठक में उन्होंने नहीं आकर इस बात की मानो पुष्टि भी कर दी हो। बताया जा रहा है कि लोगों को याद नहीं कि पूर्व में कार्यमंत्रणा समिति की कोई बैठक बिना संसदीय कार्य मंत्री की गैरहाजिरी में हुई हो।
बैठक में सरकार की ओर से लोकनिर्माण व सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने भाग लिया।
गौरतलब है कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में में विधानसभा सत्र के दौरान होने वाले कामकाज की रूपरेखा तय की जाती है और उसमें संसदीय कार्यमंत्री की सहमति अनिवार्य होती है।
विधानमंडल सत्र की सर्वदलीय बैठक माता प्रसाद पांडेय की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान प्रमोद तिवारी, प्रदीप माथुर, स्वामी प्रसाद मौर्य, अंबिका चौधरी, हुकुम सिंह, राधा मोहन अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे लेकिन आजम की गैरहाजिरी रही।
इस तरह एक बार फिर ये बातें जोर पकड़ने लगी हैं कि क्या वह मुजफ्फरनगर कांड में सरकार का पक्ष सदन में रखने से बचना चाहते हैं? यह भी आशंका जताई जाने लगी है कि वह मानूसन सत्र में शामिल होंगे कि नहीं?
आजम इसी तरह आगरा में हुई सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी नहीं पहुंचे थे। हालांकि बाद में सीएम अखिलेश यादव खुद उनके घर गए थे और दोनों नेताओं की लगभग एक घंटे तक बातचीत हुई थी।
इस मुलाकात के बाद ऐसा माना जाने लगा था कि आजम का गुस्सा खत्म हो गया है लेकिन सर्वदलीय बैठक में उनके नहीं आने से एक बार फिर आजम और मुलायम की दोस्ती पर शक गहराने लगा है।
सर्वदलीय बैठक सोमवार को भी होगी। फिलहाल 16-20 सितंबर तक सत्र पर सहमति हो गई है।
इस बार विधानमंडल सत्र में मुजफ्फरनगर हिंसा को लेकर जबरदस्त हंगामे के आसार हैं। विपक्ष ने जहां मुजफ्फरनगर कांड समेत तमाम अन्य मुद्दों पर सदन में सरकार को घेरने की तैयारी कर रखी है।
वहीं सरकार ने जल्द से जल्द अनुपूरक बजट पास कराने के साथ ही अन्य विधायी कार्य निपटा लेने की रणनीति बनाई है। विपक्ष के तेवरों को देखते हुए सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाने के आसार कम ही दिख रहे हैं।