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Lucknow News: मंच पर उतरी आजाद की देश के प्रति अटूट आस्था

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अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान में बुधवार को नाटक का मंचन हुआ।
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लखनऊ। महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की देश के प्रति अटूट आस्था का नजारा बुधवार शाम अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के मंच पर देखने को मिला। आजाद की 119वीं जयंती पर नाटक हमारे आजाद का मंचन किया गया।
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बालक आजाद की भूमिका में हेमंत शुक्ला ने अंग्रेज अफसर के सामने निर्भीक होकर अपना नाम आजाद बताया तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। अंग्रेज ने कोड़े बरसाए, पर आजाद के चेहरे पर शिकन नजर नहीं आई।

नाटक में दिखाया गया कि कैसे चंद्रशेखर आजाद ने 1928 में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन नाम का संगठन खड़ा किया और उससे क्रांतिकारियों को जोड़ा। अंग्रेज हुकूमत को नाकों चने चबाने पर मजबूर करने वाले चंद्रशेखर आजाद इलाहाबाद में जब अंग्रेजों से घिर गए तो अंत समय तक उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया। जब उनके पास एक ही गोली बची तो उन्होंने वह अपनी कनपटी में मार ली। जीते जी वे अंग्रेजों के हाथ नहीं लग सके। उनकी वीरता ने पूरे देश के नवजवानों को देश के लिए लड़ने के लिए तैयार किया। युवा चंद्रशेखर की भूमिका शुभम पांडेय ने निभाई। मुख्य भूमिकाएं निभाईं योगेंद्र पाल, दिनेश, विपिन, स्वाति, पीहू, अंशिका, निहारिका, अवि पांडेय, अंबुज अग्रवाल ने। सुअंश सक्सेना सूत्रधार रहे।
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