भगवान राम के मंदिर निर्माण के साथ धर्मनगरी अयोध्या के 204 पौराणिक स्थानों को विकसित किया जाना है। प्रथम चरण में कुंडों का विकास, दूसरे चरण में अति प्राचीन मंदिरों का विकास व बाद में पौराणिकता से जुड़े रास्तों का विकास किया जाएगा। इसकी पूरी कार्य योजना उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग तैयार कर रहा है।
योजना की अनुमानित लागत 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इसका शासन में प्रजेंटेशन हो चुका है। मौजूदा समय में डीपीआर बनाने की तैयारी चल रही है। भगवान राम का मंदिर बनने के बाद विश्व के बड़े पर्यटक स्थलों में अयोध्या शामिल होगा।
एक अनुमान के अनुसार अयोध्या में प्रतिदिन 20 हजार पर्यटकों की आमद होगी। केंद्र व प्रदेश सरकार इस बात पर मंथन कर रहा है कि किस प्रकार पर्यटकों को अयोध्या में रोका जाए, जिससे देश व प्रदेश की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो।
शासन का सोचना है कि भगवान राम के मंदिर का दर्शन पूजन एक दिन में समाप्त हो जाएगा। अगर पर्यटक को रोकना है तो कुछ ऐसी चीजें डेवलप की जाएं जिससे पर्यटक एक सप्ताह से लेकर एक पखवारे तक रुकें। जिससे देश व प्रदेश को आर्थिक फायदा भी मिले।
इसी के तहत उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग एक नई योजना की तैयारी में है। पर्यटन विभाग ने अयोध्या में 204 पौराणिक स्थानों को चिह्नित किया है। इसमें प्रथम चरण में दो दर्जन से अधिक पौराणिक कुंड शामिल हैं। इनको पर्यटक सुविधाओं के साथ पौराणिक लुक में विकसित किया जाएगा।
दूसरे चरण में अयोध्या के प्राचीन मंदिर को शामिल किया जाएगा। अयोध्या में बहुत से ऐसे मंदिर हैं, जो पौराणिक होने के साथ ही अपने में इतिहास समेटे हुए हैं, लेकिन इसकी जानकारी आम जनमानस को नहीं है। पर्यटन विभाग इनकी पौराणिकता को स्थिर करते हुए नए सिरे से विकसित करेगा।
इसके बाद पौराणिक रास्तों के विकसित किया जाए। इसमें पांच कोसी,14 कोसी व 84 कोसी परिक्रमा मार्ग शामिल है। इसकी पूरी कार्य योजना पर्यटन विभाग तैयार कर रहा है। 200 करोड़ के आसपास की लागत आंकी गई है। इस पूरी योजना का मकसद ये है कि पर्यटक अयोध्या में रुकें और अयोध्या के इतिहास से रूबरू हो सकें, साथ ही यहां की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो।