श्रद्धालुओं का बढ़ रहा प्रवाह व आतंकी घटनाओं से निपटने के लिए रामनगरी का सुरक्षा तंत्र हाईटेक किया जा रहा है। इसके लिए अयोध्या धाम को एआई बेस्ड कैमरों से लैस किया जाएगा। यह कैमरे संदिग्धों के चेहरे पहचान कर उन्हें पलक झपकते ही दबोचने में मददगार होंगे।
मंदिर-मस्जिद विवाद के कारण रामनगरी सदैव संवेदनशील रही है। 500 साल के संघर्ष की पूर्णता के बाद अब इसकी संवेदनशीलता और प्रगाढ़ हो गई है। अब श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। कई खास मौकों पर वीवीआईपी व वीवीआईपी का जमावड़ा भी होता है। इसे देखते यहां की सुरक्षा व्यवस्था को फुलप्रूफ बनाने के लिए नित नई कवायद हो रही है।
ये भी पढ़ें - यूपी: टीईटी अनिवार्यता के विरोध में तेज हुआ शिक्षकों का आंदोलन, सांसदों को दिया गया ज्ञापन; बनी ये रणनीति
ये भी पढ़ें - अयोध्या मस्जिद: नयी डिजाइन के साथ 31 दिसंबर तक पास हो सकता है नया नक्शा, मार्च 2026 से शुरू होगा निर्माण
इसी कड़ी में अब राम मंदिर के आसपास के प्रमुख स्थानों को एआई बेस्ड कैमरों से लैस किया जाएगा। इसके लिए लता चौक, राम की पैड़ी, अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, शृंगारहाट, साकेत पेट्रोल पंप, पार्किंग एरिया आदि स्थानों का सर्वे किया जा रहा है। प्रथम चरण में लगभग 15 कैमरे लगाने की योजना है। जगह चिह्नित करके उच्चाधिकारियों के माध्यम से इनकी खरीद प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया जा रहा है।
भीड़ के भीतर दबोच लिए जाएंगे संदिग्ध
किसी घटना के बाद संदिग्ध को पकड़ने में घंटों सीसीटीवी फुटेज खंगालना पड़ता है। तब तक आरोपी जिले की सीमा पार कर चुका होता है, जिसे पकड़ना टेढ़ी खीर हो जाता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कैमरे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से किसी भी संदिग्ध को भीड़ के भीतर से ही पहचान लेंगे।
कंट्रोल रूम में इसका अलर्ट आते ही संबंधित को पल भर में दबोच लिया जाएगा। फेस रिकॉग्निशन सिस्टम के डाटाबेस में संदिग्ध व्यक्ति, गुमशुदा आदि की जानकारी व स्केच अपलोड करने पर उन्हें ढूंढ़ने में आसानी होगी। यह कैमरे भीड़ के बीच असामान्य व्यवहार व संदिग्ध मूवमेंट को स्वत: पहचानकर कंट्रोल रूम में अलर्ट भेजेंगे, जिससे किसी भी अनहोनी से आसानी से निपटा जा सकेगा।
अचूक सुरक्षा में कारगर सिद्ध होगी व्यवस्था
सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी का कहना है कि अयोध्या धाम की सुरक्षा अचूक बनाने में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम कारगर साबित होगा। बड़े आयोजनों, त्योहारों व अन्य मौकों पर बढ़ी भीड़ को नियंत्रित करने में यह प्रणाली उपयोगी होगी। पहले से वांछित अपराधियों, संदिग्ध व्यक्तियों, गुमशुदा लोगों आदि का विवरण इसमें दर्ज किया जाएगा। जगह चिह्नित करने के बाद उच्चाधिकारियों के माध्यम से इन्हें लगवाने की प्रक्रिया शुरू होगी।