सावन झूलनोत्सव 27 जुलाई से शुरू होगा। भव्य मंदिर में रामलला सहित चारों भाई रजत हिंडोले पर विराजमान होकर 13 दिनों तक भक्तों को दर्शन देंगे। 20 फीट दूर से श्रद्धालु अपने आराध्य को झूला विहार करते हुए देख पाएंगे। इस बार रामदरबार में भी झूलनोत्सव का आनंद बिखरेगा। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से झूलनोत्सव की तैयारी शुरू कर दी गई है।
रामलला के दरबार में झूलनोत्सव की परंपरा अन्य मंदिरो से अलग है। राम मंदिर में नाग पंचमी से झूलनोत्सव का आनंद छलकता है जबकि अन्य मंदिरों में सावन शुक्ल तृतीया से झूलनोत्सव की छटा बिखरने लगती है। राम मंदिर के भूतल पर विराजमान बालकराम समेत चारों भाइयों को गुढ़ी मंडप में झूले पर नाग पंचमी यानी 29 जुलाई को विराजमान कर दिया जाएगा। रक्षाबंधन तक झूले पर ही विराजमान होकर रामलला भक्तों को दर्शन देंगे। इस बीच मंदिर में गीत-संगीत की भी धूम होगी। रामलला को प्रख्यात कलाकार कजरी व बधाई गीत सुनाएंगे। इसके लिए कलाकारों की सूची तैयार की जा रही है।
राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र ने बताया कि सावन झूलनोत्सव पूरी भव्यता के साथ राम मंदिर परिसर में मनाया जाएगा। इस बार रामलला के साथ-साथ राजाराम के दरबार में भी झूलनोत्सव का आयोजन होगा। रामलला व राम दरबार में अलग-अलग कलाकार गीत-संगीत की प्रस्तुति देंगे। राम दरबार के लिए नए झूले का भी निर्माण कराया जा रहा है।
ट्रस्ट ने 2021 में कराया था झूले का निर्माण
डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राम मंदिर में विराजमान रामलला के दरबार में सावन शुक्ल पंचमी से सावनी संस्कृति की धूम शुरू हो जाएगी। 21 किलो के रजत हिंडोले पर रामलला विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इस झूले का निर्माण 2021 में कराया गया था। इससे पहले रामलला लकड़ी के झूले पर झूला झूलते थे। बताया कि रोजाना शाम 6 से 7 बजे तक सांस्कृतिक संध्या भी सजेगी। विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।