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रामलला के पुजारियों के दिन बहुरने के आसार, न्यूनतम वेतन से भी कम था पारिश्रमिक

Sat, 16 Nov 2019 01:04 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
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पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास - फोटो : amar ujala
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब विराजमान रामलला का मंदिर भव्य व दिव्य बनेगा ही, उनके पुजारियों के पारिश्रमिक समेत राग-भोग में भी कोई कमी नहीं आएगी। अब तक कोर्ट के निर्देशानुसार साल-दर-साल महंगाई से तुलना करके बजट बनाना पड़ता था।

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रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास कहते हैं कि अयोध्या के हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ आदि किसी भी मंदिर की तुलना में यहां का खर्च बहुत कम था। जैसे-तैसे राग-भोग और पुजारियों का जीवन यापन होता रहा है। मुख्य पुजारी के रूप में उन्हें 13 हजार रुपये मासिक मिलता है, जबकि चार अन्य पुजारियों को आठ-आठ हजार रुपये मासिक दिया जाता है।

इसके अलावा कार्यरत 4 कर्मचारियों को तो मात्र छह-छह हजार रुपये दिए जाते हैं। पुजारियों का यह पारिश्रमिक सरकार के न्यूनतम वेतन अधिनियम की तुलना में भी कम था। उन्होंने बताया कि राग-भोग के लिए भी हर माह मात्र 30 हजार रुपये मिलता था।

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इस बार रामनवमी पर मिले थे 51 हजार रुपये

रामलला समेत अन्य विराजमान विग्रहों के वस्त्र आदि के लिए इस बार रामनवमी पर 51 हजार रुपये मिला था, जबकि वस्त्र से लेकर पंचमेवा, पांच तरह की पंजीरी, पंचामृत आदि में खर्च 56 हजार हुआ था। रामनवमी पर इसके पहले 42 हजार ही मिलता था।

ऐसे में हर दिन के लिए तय अलग-अलग सात वस्त्र बनवाना, फटने पर उसे बदलते रहना मुश्किल होता था। कई बार पुराने वस्त्र फट जाते थे। वहीं, अयोध्या के तमाम मंदिर हैं, जहां भगवान को रोज नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। सतेंद्र दास कहते हैं कि राम मंदिर का दावा करने वाले तमाम लोग आज ट्रस्ट के नाम पर हक की बात करते हैं, लेकिन उन्हें कभी ध्यान नहीं आया कि रामलला को वस्त्र आदि का दान करें।
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