ये मूर्तियां सीमेंट, सरिया और कंक्रीट के मिश्रण से बनाई जा रही हैं। इन मूर्तियों को इस तरह बनाया जा रहा है कि ये श्रीराम के जीवनकाल के आरंभ से लेकर सरयू में जलसमाधि होने तक के सभी प्रमुख प्रसंगों से श्रद्धालुओं का रूबरू कराएं। विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा बताते हैं कि 1991 में कल्याण सिंह सरकार ने राम जन्मभूमि न्यास को लगभग 42 एकड़ जमीन लीज पर दी थी।
लीज पर मिली इसी जमीन पर राम कुंज की स्थापना की तैयारी थी मगर 1993 में केंद्र सरकार ने उक्त जमीन का अधिग्रहण कर लिया। जिससे वहां रामकुंज की स्थापना की इच्छा पूरी न हो सकी। अब राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के साथ ही रामकथा कुंज को भी विकसित करने का स्वप्न साकार होगा।
रामसेवकपुरम में आकार ले रहे रामकथा के विभिन्न प्रसंग देख ऐसा प्रतीत होता है जैसे मानो त्रेतायुग में आ गए हैं। हनुमान जी के बगल के अधिष्ठान पर दशरथ पु़त्रेष्टि यज्ञ कर रहे होते हैं। एक अन्य प्रसंग में चारों भाई गुरु के आश्रम में धनुष चलाने का अभ्यास कर रहे हैं।
तो एक प्रसंग में राम बनवास के बाद राजा दशरथ की मृत्यु का प्रसंग कुछ क्षण के लिए भावविभोर कर देता है। ऐसे ही अन्य प्रसंगों को जीवंत करने में जुटे मुख्य कारीगर रंजीत मंडल बताते हैं कि हमें भी इंतजार है कि कब ये मूर्तियां राममंदिर का हिस्सा बनेंगी और हमारा जीवन धन्य होगा।