राम मंदिर के दान में घपले की तीन सदस्यीय एसआईटी जांच करेगी। टीम 15 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी। ट्रस्ट के अनुरोध के बाद शासन ने टीम का गठन किया है। टीम सात दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेगी। जांच के दौरान एसआईटी को कई जवाब तलाशने होंगे।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर को मिले दान में गबन के तूल पकड़ने के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया। एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष वित्त सचिव नीलरतन शामिल हैं। दल सात दिन में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देगा।
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एसआईटी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान में गड़बड़ी के आरोपों की जांच करेगी। अधिकारियों ने बताया, ट्रस्ट के अनुरोध पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी के गठन के निर्देश दिए। जांच पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए एसआईटी में प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।
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एक सप्ताह पहले यह विवाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों से शुरू हुआ था। सपा प्रमुख ने दावा किया कि मंदिर को मिले दान में से करोड़ों रुपये गायब होने की खबरें सामने आ रही हैं।
अब तक वित्तीय गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है: चंपत राय
उन्होंने मंदिर ट्रस्ट और सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए थे और सुप्रीम कोर्ट से इस पर स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया था। आरोपों पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पहले ही कहा था कि आंतरिक ऑडिट चल रहा है और अब तक वित्तीय गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है।
उन्होंने बताया था, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और ट्रस्ट के प्रतिनिधि नियमित तौर पर ऑडिट कर रहे हैं। हालांकि, शनिवार को ट्रस्ट ने सीएम को पत्र लिखकर एसआईटी जांच की मांग की थी। देर शाम सरकार ने एसआईटी गठित कर दी।
एसआईटी को तलाशने होंगे कई जवाब
मामला प्रकाश में आने के बाद लगातार इसे दबाने का प्रयास किया गया। ट्रस्ट बेहद गोपनीयता से जांच करता रहा। अब जब एसआईटी तफ्तीश करेगी तो देखना होगा कि क्या मामले की सभी परतें खुलेंगी?
एसआईटी को कई सवालों के जवाब तलाशने होंगे। जो संदिग्ध पकड़े गए हैं, केवल उनकी ही भूमिका है या इसके पीछे कोई और है? क्या ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी की भूमिका है? ऐसे सवालों के जवाब भी एसआईटी की जांच के बाद शायद ही मिल पाएं।
पांच नाम आए सामने
सूत्रों के मुताबिक, दान राशि में हेरफेर कर करोड़ों रुपये के गबन में अब पांच मुख्य नाम लवकुश मिश्रा, अवनीश, अनुकल्प, करुण और रमाशंकर सामने आए हैं। अब तक हुई रिकवरी भी इन्हीं ने कराई है। ये सभी दान राशि की गिनती की ड्यूटी से जुड़े हैं। इनके खिलाफ पुख्ता सुबूत भी मिले हैं।
आठ करोड़ से अधिक का हेरफेर... अब तक 2.98 करोड़ की रिकवरी
राम मंदिर की दान राशि में गबन के मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। यह रकम पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर बरामद की गई है। गुपचुप ढंग से चल रही जांच में आठ करोड़ रुपये से अधिक के हेरफेर के संकेत व साक्ष्य मिले हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद यह राशि घट या बढ़ सकती है।
मामले के खुलासे के बाद से ट्रस्ट गोपनीय जांच में जुटा है। लेकिन पदाधिकारी लगातार चुप्पी साधे हैं। आधिकारिक तौर पर पुलिस को भी शामिल नहीं किया गया है। लेकिन करोड़ों का गबन की रिकवरी की जद्दोजहद में सभी जुटे हैं। पकड़े गए संदिग्धों के अलावा और कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं इसका पता लगाया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक अभी तक गबन की राशि सही आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन संदिग्धों से पूछताछ में मिली जानकारी व साक्ष्यों के आधार पर आठ करोड़ से अधिक के खेल का अंदेशा है।
संदिग्धों के घर व ठिकानों के साथ बैंक खाते भी खंगाले जा रहे हैं। इनमें अवनीश के खाते से पांच लाख रुपये मिले हैं। यह रकम उसने दान राशि से गायब की थी। जेवरात भी मिले हैं।