सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के रामलला मंदिर का तिरपाल बदलने की अनुमति दे दी है। अब तिरपाल बदलने को लेकर कुछ प्रश्न भी उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि तिरपाल तीन साल में बदलना होता है। पिछली बार जुलाई 2014 में ही तिरपाल बदला गया था।
निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास के प्रतिनिधि हरदयाल शास्त्री ने कहा कि तिरपाल बदलने के लिए तीन साल का समय तय है। जुलाई 2014 में तिरपाल बदली गई थी, तो फटी कैसे।
एएसआई और ऑब्जर्वर की जांच में कहा गया कि पानी टपकने से सुप्रीमकोर्ट से यथा स्थिति आदेश का उल्लंघन हो रहा है। अब उसकी मरम्मत के लिए आदेश आया है। तिरपाल रामलला के चढ़ावे की धनराशि से बदला जाता है, दो लाख से अधिक खर्च हुआ। पूरे मामले की जांच हो, फिर रामलला का पैसा खर्च होगा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला रामलला के मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर में फटे तिरपाल की मरम्मत करने को लेकर है। इस कार्य को फैजाबाद के कलेक्टर और दो स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में कराए जाने की मंजूरी दी गई है।
इधर बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई हाशिम अंसारी ने कहा कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी राजनीति कर रहे हैं। उन्हें अयोध्या के साढ़े छह हजार मंदिरों में सुविधाओं की चिंता नहीं है।
आजादी के बाद पहले कलेक्टर नैय्यर के नक्शे कदम पर अब कमिश्नर और डीएम चल रहे हैं। इन्हें मुलायम का सपोर्ट है। फिजा खराब होने से बचाना है तो इन्हें तत्काल सरकार हटाएं।
हाशिम ने फिर प्रधानमंत्री की तारीफ की, कहा कि मोदी मंदिर की राजनीति करने वालों की नहीं सुन रहे हैं, वे विकास करने वाले नेता हैं। हाशिम ने कहा कि हमने ऐलान किया था कि बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे। क्योंकि इसका फैसला जल्द नहीं हो रहा है।
इधर फैजाबाद के कमिश्नर और विवादित परिसर के रिसीवर सूर्य प्रकाश मिश्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला रामलला के मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर में फटे तिरपाल की मरम्मत करने को लेकर है। इस कार्य को फैजाबाद के कलेक्टर और दो स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में कराए जाने की मंजूरी दी गई है।