बड़ी बुआ के नाम से मशहूर सूफी संत खातून बड़ी बीबी की मजार आज भी हिंदू संत-महंत समेत उलेमा-इकराम की आस्था व विश्वास का केंद्र है। महिलाएं इन्हें अपनी आन-बान-शान मानती हैं तो आने वाले हर धर्म के पुरुष ज्ञान-समर्पण व समृद्धि का द्योतक।
कहते हैं कि 12वीं सदी में नगर कोतवाल ने उलमाओं को मिलाकर इनसे शादी का प्रस्ताव किया था, जिसे उन्होंने सादगी से खारिज कर दिया। मगर, जब जबरदस्ती की नौबत आई तो कोतवाल से पूछा, मेरी सबसे खूबसूरत चीज क्या है? जवाब मिला आंखें। कहते हैं कि तत्काल बड़ी बीबी ने अपनी दोनों आंखें निकालकर पत्ते पर रख दीं। साथ ही बद्दुआ दी कि अब यहां न कोई आलिम रहेगा न जालिम। लोग कहते हैं कि यहां की उदासी में आज भी इस बद्दुआ का असर कायम है।