अयोध्या एक्ट बनाकर राम मंदिर बनाने का पूरा ढांचा तय किया गया था। जानकार बताते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव राम मंदिर बनाना चाहते थे, मगर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से भेजे गए मस्जिद से पहले वहां कोई हिंदू मंदिर या स्थान संबंधी सवाल का उत्तर टाल दिया था। अब 27 साल बाद वही कानून रामलला के भव्य मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त करने के साथ नव्य अयोध्या का सपना भी साकार करने जा रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अयोध्या एक्ट की धारा छह व सात में स्पष्ट तौर पर राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने से लेकर उसकी वित्तीय व प्रबंधकीय जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था है। यह सब कवायद केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में होनी है, लिहाजा यहां से सारा ब्योरा भेजा जा रहा है। अब विस्तारीकरण को लेकर तैयारी चल रही है।
सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर की भव्यता व दिव्यता इतनी अधिक बनाने की कोशिश हो रही है कि अयोध्या से देश की पहचान जुड़ सके। अभी तक सिर्फ इतना सामने आ रहा है कि सरकार वर्तमान सड़क मार्ग के अलावा दो कॉरिडोर विकसित कर सकती है। पहला, सरयू के नयाघाट से सीधे अधिगृहीत परिसर के पास तक का होगा और दूसरा, यहां से फैजाबाद शहर से जुड़ेगा।
इसके अलावा हनुमानगढ़ी से रामलला दर्शन मार्ग का चौड़ीकरण समेत प्राचीन व पौराणिक भवनों को चमकाने की तैयारी है। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले सभी धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों का विकास होगा। वहां के लिए बेहतर यातायात सुविधाएं भी होंगी। पर्यटकों व श्रद्धालुओं को पूरा अयोध्या दर्शन कराने की योजना बनेगी। केंद्र सरकार ने तीनों परिक्रमा मार्गों के रूट व पड़ने वाले स्थलों समेत आसआस के सभी धार्मिक स्थलों की सूची व मैप तक मंगाया है।
अयोध्या एक्ट के तहत केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की कवायद कर रही है। यहां से जो भी जानकारी मांगी जा रही है, वह दी जा रही है। अभी यह तय नहीं है कि कहां-कितनी भूमि की जरूरत होगी, सब कुछ केंद्र सरकार के आदेश पर होगा। - अनुज कुमार झा, जिलाधिकारी, अयोध्या