कोरोना वायरस के संक्रमण का खौफ सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग कोरोना से बचाव के लिए जरूरी है। पर, ऐसे भी मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें क्वारंटीन का वक्त पूरा करने के बावजूद समाज लोगों को अपना नहीं पा रहे।
कहीं ‘कोरोना आया- कोरोना आया’ के ताने हैं तो कहीं क्वारंटीन को लेकर तनाव की स्थितियां, नौबत मारपीट तक पहुंच जा रही है। लखनऊ के निगोहां इलाके के अघईया निवासी शिवकुमार के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के मायने दिलों की दूरियां बन गया है।
शिवकुमार का दिल्ली से गांव आना ही बखेड़े का कारण बन गया। 14 दिन के होम क्वारंटीन के बावजूद उनकी गाड़ी पटरी पर नहीं आई। वह मनरेगा में मजदूरी करने पहुंचे तो वहां भी बेरुखी का सामना करना पड़ा। कोई उनसे बात ही नहीं करता था।
वहीं, आजमगढ़ के सरायमीर इलाके के खुदकाश्त मोहल्ले में तो बुधवार शाम अलग ही तरह का मामला सामने आया। दिल्ली से लौटी जितली देवी के परिवार को लोग कोरोना संक्रमित कहकर चिढ़ाने लगे। नतीजतन मारपीट हुई और 15 लोग घायल हो गए। गांवों में क्वारंटीन को लेकर जगह-जगह से तनातनी के मामले सामने आ रहे हैं। परिवारों को बहिष्कार तक की चेतावनी दी जा रही है।