निर्वाचन आयोग उन संवेदनशील स्थानों का चयन करने जा रहा है जहां चुनावी खर्च काफी अधिक होता है। यह स्थान शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग चिन्हित किए जाएंगे।
इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जागरूक करने के लिए जागरूकता समूहों का गठन भी किया जाएगा। जागरूकता समूह में पांच से लेकर 10 सदस्य होंगे।
इसमें कम से कम दो महिलाएं भी रखी जाएंगी। सभी सदस्य स्वैच्छिक होंगे। यह अपने-अपने इलाकों में मतदाताओं को चुनाव के दौरान नैतिकता के आधार पर वोट देने की अपील करेंगे।
नगद, उपहार, शराब, सामुदायिक भोज जैसे प्रलोभन से मतदाताओं को बचने का संदेश भी देंगे। समूह यह भी बताएंगे कि प्रलोभन देने व लेने पर आईपीसी की धारा के तहत एक साल की सजा तथा नगद जुर्माना हो सकता है।
समूह वोट के लिए नोट लेने के दुष्परिणाओं के बारे में भी लोगों को जागरूक करेंगे। इसके लिए नुक्कड़ सभाएं, रैली, बहस, समूह चर्चा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसके लिए विज्ञापन, पोस्टर, बैनर आदि सामग्री चुनाव कार्यालय उपलब्ध कराएगा। जिला निर्वाचन अधिकारी व रिटर्निंग ऑफीसर इन समूहों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए समय-समय पर संवाद भी करेंगे।
कौन बन सकते हैं सदस्य
सरकारी कर्मचारी, बैंक अधिकारी, पीएसयू, कार्पोरेट जगत की हस्ती, प्रख्यात पत्रकार, प्रख्यात शिक्षाविद, विद्यार्थी, सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि, एनएसएस, एनसीसी कैडेट, अवकाश प्राप्त सैनिक आदि
यह होंगे समूह के काम
स्थानीय स्तर पर चुनावी प्रलोभन पर नजर रखेंगे।
चुनाव में नैतिकता के आधार पर मतदान के लिए अपील करेंगे।
नगद, उपहार, शराब, सामुदायिक भोज देने आदि पर नजर रखेंगे।
ऐसे मामलों पर सीधे काईवाई न करके इसकी शिकायत जिला शिकायत अनुश्रवण प्रकोष्ठ में करेंगे।
इसके बाद फ्लाइंग स्क्वायड व स्टैटिक सर्विलांस टीम तत्काल स्थल पर पहुंचकर कार्रवाई करेगी।