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19 साल बाद बना संयोग: इस बार चार नहीं सावन में पड़ेंगे आठ सोमवार, जानिए क्यों हुआ ऐसा?

Sat, 01 Jul 2023 06:59 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, नैमिषारण्य/सीतापुर

सार

सावन चार जुलाई से शुरू होने जा रहा है। 19 साल के बाद ऐसा संयोग बनने जा रहा है कि इस बार सावन में चार नहीं आठ सोमवार पड़ने जा रहे हैं। 
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सावन 2023 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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इस साल सावन कई मायनों में खास है। अबकी चार जुलाई से प्रारंभ हो रहा सावन का महीना 59 दिनों का होगा। इसमें शिवभक्तों को आठ सोमवार के व्रत करने का अवसर मिलेगा। मान्यता के अनुसार, 19 साल बाद यह संयोग बन रहा है। इससे पहले 2004 में यह संयोग बना था। इसके अलावा सावन में सर्वार्थ सिद्ध योग भी शिव भक्तों पर कृपा बरसाएगा। दो माह का सावन होने से इसे मलमास, अधिकमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है।

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सावन में आमतौर पर 4 या 5 सोमवार पड़ते हैं। लेकिन इस बार शिवभक्तों को अपने आराध्य का पूजन-अर्चन व जलाभिषेक करने के लिए 8 सोमवार मिलेंगे। अधिमास के कारण सावन दो माह रहेगा। सावन चार जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगा। मलमास व चतुर्मास होने से इस बार सावन में भगवान शिव के साथ विष्णु की कृपा भी भक्तों पर बरसेगी। शास्त्रों में इस मास का विशेष महत्व होता है। मलमास भगवान विष्णु व भगवान शिव की पूजा आराधना के लिए खास माना गया है। सावन में मलमास लगने पर भगवान शिव की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मलमास दान-पुण्य के लिए भी शुभ माना गया है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्ध योग बनने से इस बार का सावन शिव भक्तों के लिए विशेष पुण्यदायी है।

आठ सावन मंगला गौरी व्रत भी पड़ेंगे

सावन में आठ सोमवार के अलावा मंगला गौरी व्रत भी आठ पड़ेंगे। पहला मंगला गौरी व्रत चार जुलाई को होगा। दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 जुलाई, तीसरा 22 अगस्त, चौथा 29 अगस्त को होगा। सावन अधिकमास का मंगला गौरी व्रत पहला 18 जुलाई, दूसरा 25 जुलाई, तीसरा एक अगस्त, चौथा आठ अगस्त और पांचवां 15 अगस्त को रखा जाएगा।
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अधिक मास का महत्व

सावन में पूजा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
पंडित प्रभाकर द्विवेदी ने बताया हिंदू कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा की गणना पर बनाए जाते हैं। सौर्य कैलेंडर में 365 दिन और 6 घंटे का एक साल होता है। जिसमें हर 4 साल पर एक लीप ईयर होता है। उस लीप ईयर में फरवरी 28 की बजाए 29 दिनों की होती है। चंद्र कैलेंडर में एक साल 354 दिनों का होता है। सौर्य कैलेंडर और चंद्र कैलेंडर के एक वर्ष में 11 दिनों का अंतर होता है। इस अंतर को खत्म करने के लिए हर तीन साल पर चंद्र कैलेंडर में एक अतिरिक्त माह जुड़ जाता है। वह माह ही अधिक मास होता है। इस तरह से चंद्र कैलेंडर और सौर्य कैलेंडर के बीच संतुलन बना रहता है। इस वजह से हर 3 साल में एक अधिक मास होता है।

देवदेवेश्वर में जलाभिषेक को उमड़ता भक्तों का सैलाब

सावन भर नैमिष स्थित देवदेवेश्वर धाम में भगवान शिव का जलाभिषेक व पूजन-अर्चन करने के लिए भक्तों का भारी सैलाब उमड़ता है। सोमवार को हजारों कावंड़िए भी जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। सावन को लेकर यहां तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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