लखनऊ जंक्शन पर लगीं ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनें (एटीवीएम) यात्रियों के लिए मुसीबत बन गई हैं। सर्वर डाउन और बैटरी बैकअप नहीं होने से टिकट का भुगतान हो जाने के बाद भी यात्रियों के टिकट नहीं बन पा रहे हैं। इससे यात्रियों व मशीनों पर तैनात फैसिलिटेटरों के बीच कहासुनी तक की नौबत हो रही है।
दरअसल, पूर्व रेलमंत्री सुरेश प्रभु के कार्यकाल में जनरल टिकट के लिए काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारों से यात्रियों को राहत देने के लिए ‘मिशन फाइव मिनट’ शुरू किया गया था। इसके तहत रेलवे स्टेशनों पर एटीवीएम लगवाई गईं।
पूर्वोत्तर रेलवे के एवन श्रेणी के लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर छह एटीवीएम लगवाई गईं, जहां स्मार्ट कार्ड से टिकट बनवाने की सुविधा पैसेंजरों को दी गई। पिछले कुछ महीनों से ये मशीनें पैसेंजरों के लिए मुसीबत बनी हुई हैं। इन मशीनों पर तैनात फैसिलिटेटर उन यात्रियों को टिकट बनाकर देते हैं, जिनके पास स्मार्ट कार्ड नहीं है।
जंक्शन की छह मशीनों में से एक खराब पड़ी है, जबकि पांच मशीनों में बैटरी बैकअप नहीं है। ऐसे में बिजली जाने पर तत्काल मशीन बंद हो जाती है, जिससे टिकट अधूरा रह जाता है। वहीं आए दिन सर्वर डाउन रहता है और पैसेंजरों को दिक्कतें होती हैं। टिकट नहीं बन पाता है और उन्हें दोबारा काउंटरों पर लंबी कतारों में लगना पड़ता है।
पैसे की वापसी भी मुश्किल
डेमो
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पैसेंजरों के पास एटीवीएम का स्मार्ट कार्ड नहीं है तो मशीन पर तैनात फेसिलिटेटर अपने कार्ड से टिकट बनाकर देते हैं और पैसेंजरों से पेमेंट ले लेते हैं। अब जब मशीन में गड़बड़ी है तो कई बार फेसिलिटेटरों के कार्ड से पेमेंट तो हो जाता है, पर टिकट नहीं बनते। ऐसे में न तो पैसेंजर पैसे देता है, न टिकट बनता है और कार्ड से पैसा कट जाता है सो अलग। पैसे की वापसी भी मुश्किल होती है।
दुरुस्त कराएंगे गड़बड़ी
एटीवीएम का सालाना मेंटेनेंस होता है। फिलहाल मशीनों को लगे अभी सालभर भी नहीं हुआ है, लिहाजा वारंटी में ही हैं। जो गड़बड़ियां हैं, उन्हें जल्द ठीक करवाया जाएगा। - स्वदेश कुमार सिंह, सीनियर डीसीएम, पूर्वोत्तर रेलवे