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2024 के लिए साधा गणित: मंत्रिमंडल में मध्य यूपी और बुंदेलखंड का रखा खास ध्यान, मैनपुरी व कन्नौज का बढ़ा मान

Sat, 26 Mar 2022 02:53 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ/चंद्रभान यादव 

सार

मध्य क्षेत्र में बनाए गए पांच मंत्रियोें में जातीय गणित फिट रखी गई है। ठाकुर, ब्राह्मण, दलित, पाल और कुर्मी बिरादरी के एक-एक विधायक को मंत्रिमंडल में जगह देकर सामाजिक संतुलन का भी संदेश दिया है।
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शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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भाजपा ने मंत्रिमंडल में मध्य उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड का पूरी तरह से ध्यान रखा है। मैनपुरी में कैबिनेट मंत्री और कन्नौज में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) देकर मुलायम के गढ़ में सियासी संदेश देने का प्रयास किया है। मध्य क्षेत्र में बनाए गए पांच मंत्रियोें में जातीय गणित फिट रखी गई है। ठाकुर, ब्राह्मण, दलित, पाल और कुर्मी बिरादरी के एक-एक विधायक को मंत्रिमंडल में जगह देकर सामाजिक संतुलन का भी संदेश दिया है। इसी तरह बुंदेलखंड से इस बार चार मंत्री बनाए गए हैं। इन दोनों क्षेत्रों का रुतबा बढ़ाने को 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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मंत्रिमंडल का गणित बैठाते समय मध्य और बुंदेलखंड की हर परिस्थितियों पर पुख्ता रणनीति बनाई गई है। मध्य क्षेत्र की बात करें तो पिछले योगी सरकार में यहां से तीन कैबिनेट और एक राज्यमंत्री बनाए गए थे। इस बार इनकी संख्या बढ़ाकर पांच कर दी गई है। पिछली बार कन्नौज के छिबरामऊ से विधायक अर्चना पांडेय को राज्यमंत्री और एटा के जलेसर से विधायक एसपी बघेल को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। भाजपा लंबे समय से मुलायम के गृहक्षेत्र को टारगेट पर रखे हुए हैं। यहां कमल खिलाने के लिए लगातार अभियान चलाए गए, जिसका असर विधानसभा चुनाव में भी दिखा है।

ऐसे में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र में शामिल मैनपुरी सदर से विधायक बने ठाकुर जयवीर सिंह को कैबिनेट मंत्री तो कन्नौज से सपा का किला ढहाकर विधायक बने असीम अरुण को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। कन्नौज में भाजपा ने छिबरामऊ और तिर्वा के साथ इस चुनाव में कन्नौज सदर पर भी कब्जा जमा लिया है। इस तरह इन दोनों जिलों से एक-एक मंत्री देकर गैर यादव जातियों को गोलबंद किया गया है।
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यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि सपा के गढ़ में कमल खिलाने पर इनाम मिलना तय है। मतदाताओं को समझाने का प्रयास है कि सपा के गढ़ में भाजपा से जुड़ने का मतलब है कि उनके क्षेत्र की पहुंच कैबिनेट तक बनी रहेगी। इसी तरह कानपुर देहात की सभी चार और शहर की 10 में सात सीटों पर भगवा लहराने का असर भी कैबिनेट में दिखा है। पिछली बार कानपुर से सतीश महाना और सत्यदेव पचौरी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।

बाद में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान अजीत पाल को राज्यमंत्री बनाकर पिछड़ी जाति में पाल बिरादरी को साधा गया था। योगी 2.0 मंत्रिमंडल में भी अजित का राज्यमंत्री का रुतबा बरकरार रखा गया है। पूर्व सांसद और इस बार भोगनीपुर से विधायक बने राकेश सचान को कैबिनेट मंत्री बनाकर कुर्मी वोटबैंक को सहेजा गया है। अकबरपुर रनिया की विधायक प्रतिभा शुक्ला को राज्यमंत्री बनाकर ब्राह्मणों को भी संदेश दिया गया है कि उनकी भागीदारी किसी भी कीमत पर कम नहीं होने दी जाएगी।

बुंदेलखंड में सीटें हुई कम, फिर भी बढा रुतबा
मंत्रिमंडल में बुंदेलखंड का रुतबा बढ़ गया है। वर्ष 2017 में यहां की 19 सीटों पर भाजपा का कब्जा था, लेकिन 2022 में तीन सीट का नुकसान हुआ। इसके बाद भी यहां मंत्रियों की संख्या बढ़ाई गई है। पिछली सरकार में यहां से राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में स्वतंत्र देव सिंह और राज्यमंत्री के रूप में मनोहर लाल पंथ को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। इस बार यहां से चार मंत्री बनाए गए हैं।

स्वतंत्र देव सिंह का रुतबा बढाकर कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसी तरह अपना दल के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष पटेल को भी कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। जबकि ललितपुर के महरौनी से मनोहर लाल पंथ और बांदा के तिंदवारी से विधायक रामकेस निषाद को राज्यमंत्री बनाया गया है। जातीय गणित के हिसाब से बुंदेलखंड में दो कुर्मी बिरादरी के नेता को कैबिनेट तो एक ओबीसी और एक दलित राज्यमंत्री बनाया गया है।

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