बेगम अख्तर की मजार पर हुए कार्यक्रम में प्रस्तुति देतीं गायिका अश्विनी भिड़े देशपांडे। -अमर उजा
लखनऊ। मल्लिका ए गजल बेगम अख्तर को उनकी ही गजलों के जरिये याद किया गया। गायिका अश्विनी भिड़े देशपांडे की सुरीली आवाज श्रोताओं के दिलों में उतरकर बेगम अख्तर की शख्सियत को स्मृतियों में ताजा कर गई।
मौका था मल्लिका ए गजल बेगम अख्तर की 51वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ठाकुरगंज स्थित पसंदबाग में बेगम अख्तर की मजार पर लखनऊ बायोस्कोप की ओर से आयोजित हाजिरी का। वर्ष 2014 से यह आयोजन हो रहा है। इस वर्ष मशहूर गायिका अश्विनी भिड़े देशपांडे ने हाजिरी लगाई। वह जयपुर-अत्रौली घराने की नामी हिंदुस्तानी खयाल गायिका हैं। इनके साथ गायिका मेघा श्यामलाल भट्ट रहीं तथा तबले पर पंडित विनोद लेले और हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र ने संगत दी।
अश्विनी ने हाजिरी की शुरुआत राग केदार से की। उन्होंने दादा की गजल ''छा रही काली घटा'', ठुमरी ''अब के सावन घर आ जा'', दादरा ''हो गई बेरिया पिया के आवन की'' सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। बेगम अख्तर की गजलों को सुनाकर उनकी स्मृतियों को ताजा कर दिया। इस अवसर पर गजलों के बीच बेगम अख्तर से जुड़े किस्से भी साझा किए गए।
बेगम अख्तर को अख्तरी बाई फैजाबादी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने लखनऊ में अपना जीवन बिताया। उनकी गायकी ने शहर की सांस्कृतिक पहचान को और भी गहरा किया। उन्होंने करीब चार सौ गजलें तैयार कीं। इनमें कई राग पर आधारित हैं और उनकी भावपूर्ण आवाज को दर्शाती हैं। गालिब, जिगर मुरादाबादी और फैज अहमद फैज जैसे शायरों के कलाम को अपनी आवाज दी। बता दें कि ठाकुरगंज स्थित पसंदबाग में स्थित बेगम अख्तर की मजार को वर्ष 2013 में संस्थाओं के प्रयास से ठीक करवाया गया था।
बेगम अख्तर की मजार पर हुए कार्यक्रम में प्रस्तुति देतीं गायिका अश्विनी भिड़े देशपांडे। -अमर उजा