इस मामले में कृष्णानगर के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक यशकांत सिंह ने अतीक के गुर्गे गुलाम मोइनुद्दीन और इरफान को गिरफ्तार करके मोहित से लूटी एसयूवी बरामद की। अन्य की तलाश में प्रयागराज में उनके ठिकानों पर दबिश दी और देवरिया जेल में अतीक के साथ बंद उसके गुर्गों की पहचान की गई।
शासन के आदेश पर अतीक को देवरिया से बरेली जेल स्थानांतरित किया गया। पुलिस ने अतीक, उसके गुर्गे मुख्तार, आलमगीर, बरकत अली, दयानंद, गुलाम सरवर, गुलाम मोइनुद्दीन और इरफान के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। आरोपी फारूक, जफर और जकी अहमद को इलाहाबाद जेल से तलब कराने के लिए बी-वारंट की अर्जी दी।
नामजद आरोपी मो. उमर पर कार्रवाई के सवाल पर पुलिस अफसर सफाई दे रहे थे कि वह देवरिया जेल में बंद अपने पिता अतीक अहमद से मुलाकात करने गया था। कारोबारी मोहित जायसवाल को बैरक में बंधक बनाकर पीटने, दस्तावेजों पर दस्तखत कराने और रंगदारी वसूलने में उसकी संलिप्तता की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस सूत्रों का कहना था कि मो. उमर के खिलाफ पहला मामला दर्ज होने से अतीक बेहद परेशान था। उसने जेल में तहकीकात करने गई पुलिस टीम पर भी दबाव बनाया और कद्दावर लोगों के जरिये बेटे को बचाने के प्रयास में था। प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश ने अतीक की बेचैनी बढ़ा दी है।