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अवैध कनेक्शन वाले आसाराम का आश्रम भी अवैध

Wed, 18 Dec 2013 08:19 AM IST
ऋषि मिश्र/लखनऊ
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सरोजनी नगर में आसाराम आश्रम की भूमि के हकदार किसान हैं। राजस्व अभिलेखों के काफी अध्यन्न के बाद यह पता चला है। यहां करीब 15 बीघा जमीन है, जो कि आठ कास्तकारों के नाम दर्ज है।
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एक भी दाखिल-खारिज आश्रम के पक्ष में नहीं हुआ है। ऐसे में आश्रम पूरी तरह से अवैध है। यहां काफी निर्माण भी किया गया है, मगर उसका कोई भी मानचित्र नहीं पास है।

इस भूमि को मेट्रो रेल परियोजना में प्रस्तावित मदर डिपो के लिए लिया जाना है। यह जानकारी सामने आने पर कि, यह भूमि कास्तकारों की है, इसका अर्जन बहुत आसान हो गया है।
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किसानों को मुआवजा देकर मदर डिपो के लिए यह भूमि ले ली जाएगी। आठ किसानों के नाम भूमि दर्ज है।

वे किसान कौन और कहां है, इसकी जानकारी करने की जिम्मेदारी सदर तहसील के लेखपालों को सौंपी गई है।

मेट्रो के मदर डिपो के लिए भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए सरोजनी नगर के बेहसा गांव और यहां आसाराम आश्रम की जमीन लिए जाने का प्रस्ताव तैयार हो गया है।

गांव की जमीन को योजना में शामिल कर जल्द ही इसके अधिग्रहण की कवायद शुरू हो गई है। एलएमआरसी चाहता है कि, आसाराम आश्रम की पूरी 15 बीघा जमीन मेट्रो डिपो के लिए ली जाए।

मगर इसके लिए जरूरी होगा कि, इसके लिए जरूरी था कि इसके वास्तविक मालिक का पता किया जाए। जमीन की मलकियत का पता करने के लिए तहसीलदार अजय आनंद वर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

अजय आनंद वर्मा ने खसरा-खतौनी की जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि, आसाराम आश्रम की भूमि जिन खसरों में आती है, वे भू राजस्व में लंबे समय से स्थानीय कास्तकारों के नाम दर्ज हैं।

इस भूमि का आश्रम के नाम पर कभी हस्तांतरण नहीं किया गया। इसलिए अब इन किसानों की तलाश की गई है।

डिपो के लिए कहां से कहां से लेंगे भूमि
आश्रम के अलावा गांव बेहसा की भी 30 एकड़ और जमीन (12 हेक्टयेर) मेट्रो डिपो के लिए अधिग्रहित की जाएगी।

इस तरह से मेट्रो डिपो के लिए 32 वीं वाहिनी पीएसी की 55 एकड़ भूमि भी लेंगे। 32 वीं वाहिनी पीएसी की कुल 85 एकड़ भूमि में से 55 एकड़ मेट्रो डिपो के लिए मिलेगी।
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बकाया 30 एकड़ पर पीएसी के पास ही रहेगी। ऐसे में मेट्रो के विशाल डिपो के लिए और अधिक भूमि की आवश्यकता थी।
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