इसमें याची ने वर्ष 2006 में छपी एक खबर को आधार बनाकर उसे मुआवजा दिलाए जाने का आग्रह किया था। साथ ही अदालत ने भी मुआवजे के मुद्दे का खुद संज्ञान लिया था। याची के अधिवक्ता का कहना था कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी, जिसे 9 मई 2005 से 8 दिसंबर 2006 तक उसके पिता की सहमति के बगैर महिला संरक्षण गृह में रखा गया था, जो अवैध था।
इसके लिये याची ने पीड़िता को राज्य सरकार से मुआवजा दिलाए जाने की गुजारिश की थी।