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बाल भिक्षावृत्ति खत्म करने को 17 हजार किमी की पैदल यात्रा पर निकला इंजीनियर, आज लखनऊ में

Tue, 05 Jun 2018 06:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आशीष शर्मा
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सड़क पर भीख मांगते बच्चों की जिंदगी बदलने के लिए दिल्ली के एक इंजीनियर ने अपना करियर दांव पर लगा दिया। इतना ही नहीं, उसने एक ऐसी मुहिम की शुरुआत की जो देखते ही देखते मिसाल बन गई। हम बात कर रहे हैं दिल्ली के आशीष शर्मा की। 

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आशीष ने बाल भिक्षावृत्ति को खत्म करने के लिए पैदल ही पूरे देश का भ्रमण करने का संकल्प लिया है। 17 हजार किमी की यात्रा पर निकले आशीष मंगलवार को लखनऊ पहुंचे। यहां उन्होंने जिले के कई अधिकारियों से मुलाकात करके लोगों को भीख न देने के लिए अभियान चलाने को कहा।

आशीष का कहना है कि सड़कों पर हजारों बच्चे भीख मांगते दिखते हैं। लोग उन्हें पैसे देकर आग बढ़ जाते हैं, लेकिन कोई उनके लिए कुछ करता नहीं। मैं उनके लिए कुछ करना चाहता था, लेकिन मुझे पता था कि व्यक्तिगत रूप से मैं 50 से 100 बच्चों से मिल सकता हूं, इसलिए मैंने अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी युवा पीढ़ी को जोड़ने की शुरुआत की।
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आशीष इस अभियान के लिए जम्मू से चलकर हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गोवा, दमन, सिलवासा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड का सफर तय कर चुके है। फिलहाल वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले तीन दिनों तक वह शहर के विभिन्न इलाकों में जाकर लोगों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे। उनका मानना है राह चलते मिलने वाले भिखारियों को भीख देने के बजाए उन्हें खाना खिलाये।

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कहां से शुरू हुआ ये अभियान

आशीष शर्मा
आशीष बताते हैं कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग पूरी करके सोनीपत में जॉब के दौरान उन्होंने कुछ भीख मांगते बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया। लेकिन उन्हें अपनी यह कोशिश उस वक्त अधूरी लगी जब उन्होंने देश भर में भीख मांग रहे बच्चों की ओर देखा। 

उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी और 22 अगस्त 2017 को पदयात्रा पर निकल पड़े। अशीष अब तक पहले चरण मे 4319 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर लोगों तक अपना संदेश पहुंचा चुके हैं। दुआएं फाउंडेशन के तहत 17 हजार किमी. की पदयात्रा को आशीष ने उनमुक्त भारत का नाम दिया है।

इस अभियान के तहत देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के गांवों में बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका कहना है कि मैं लोगों को यह बताना चाहता हूं कि भीख मांगते बच्चों को गाली न दें और शोषण करने के बजाय उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने में मदद करें।
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