‘मैं एक घर से काम करके लौट रही थी, पराग चौराहे से थोड़ा आगे एक मंदिर है। उसके थोड़ा आगे पहुंची तो सामने से एक कार में चार लड़के आए। उन लड़कों ने मेरा मुंह बंद करके मुझे जबर्दस्ती गाड़ी में चढ़ा लिया, मुझे गाड़ी की पिछली सीट की गद्दी के नीचे लिटा दिया।
मैंने शोर मचाया तो उन्होंने जोर से बाजा लगा दिया। उनमें से एक गाड़ी चलाने लगा और दो लड़कों ने मेरे साथ जोर जबर्दस्ती शुरू कर दी, और कहा कि तुम रोओगी तो गोली चला देंगे। मैंने उनसे कहा कि भैया मुझे छोड़ दो, तो और मारा।
उन सबने मुझे पैर में लाइटर से जलाया और बट से कमर पर मारा। उनमें से तीन लड़कों ने उस समय मेरे साथ गलत काम किया।’
यह बयान है पीड़िता के जो उसने मजिस्ट्रेट के सामने दिए थे। इन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपने निर्णय में शामिल किया है। इसमें पीड़िता ने 2 मई 2005 की उस भयावह घटना का जिक्र किया है, जिसने उसके जीवन केअगले 11 वर्षों को एक संघर्ष में बदल दिया। यह संघर्ष आज भी जारी है।
मैं चल नहीं पा रही थी, कुछ लोगों ने मदद की
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अपने बयान में पीड़िता बताती है कि उन लड़कों के पास एक फोन भी था, जिस पर कॉल आई थी। इसमें कोई लड़का कह रहा था कि लड़की को पकड़ लिया है, लेकिन वह मान नहीं रही है।
पीड़िता का छह बजे अगवा किया गया था और रात 11 बजे 20 रुपये हाथ में पकड़ा कर छोड़ दिया गया था। उसके अनुसार, उसे जहां छोड़ा गया, वहां उसने शोर मचाया तो कुछ स्थानीय लोग बाहर आए, घटना पूछी और पुलिस स्टेशन का रास्ता बताकर चले गए।
‘मैं चल नहीं पा रही थी, किसी तरह थोड़ी दूर गई तो एक गार्ड और उसके साथ एक आदमी मिले। घटना सुनकर वे लोग डर गए। मैंने उन्हें अपने घर का पता बताया, जो उन्हें भी नहीं मालूम था। लेकिन उन्होंने मुझे स्कूटर पर बैठा और रास्ते में एक औरत की मदद से मुझे घर पहुंचाया।’
20 हजार लेकर रफा-दफा करो मामला
आशियाना गैंगरेप
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पीड़िता ने बताया कि अपहरण के दौरान उसका भाई साथ था, जिसे अपहरण करने वाले लड़कों ने मारकर भगा दिया था। उसने घर जाकर घटना की सूचना दी जिसके के बाद पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई गई।
जब पीड़िता घर पहुंची तो पुलिस वहां आई और उसे मेडिकल कराने के लिए बलरामपुर अस्पताल ले गई। यहां मेडिकल के बाद वह घर लौटी और बेहोश हो गई। उसे फिर अस्पताल ले जाया गया।
पीड़िता ने बताया कि घटना के अगले दिन रात को जब वह अस्पताल में भर्ती थी तभी कुछ लोग गाड़ी से वहां आए और उसके परिजनों से कहा कि 20 हजार रुपये ले लो और लड़की का इलाज वे करवाएंगे।
मामला रफा-दफा करने के लिए कहा गया। वहां मौजूद कुछ जानने वालों ने यह पेशकश मानने के लिए कहा, लेकिन पीड़िता के पिता ने इससे इन्कार कर दिया।