लखनऊ। बुजुर्गों को मोतियाबिंद से बचाने और अंधत्व निवारण की दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़ी पहल की है। अब आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित ‘रोशनी’ मोबाइल एप के जरिये लोगों की आंखों की जांच करेंगी। इस तकनीक से 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मोतियाबिंद की शुरुआती पहचान करना आसान हो जाएगा।
विभागीय तैयारियों के अनुसार, सभी आशा कार्यकर्ताओं के स्मार्टफोन में रोशनी एप लोड कराया जा रहा है। इस एप की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता है, जो 96 से 98 प्रतिशत तक है। जांच के दौरान अगर किसी व्यक्ति में मोतियाबिंद के लक्षण पाए जाएंगे, उसे इलाज और ऑपरेशन के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पंजीकृत कर दिया जाएगा।
ऐसे काम करेगा एप, नहीं पड़ेगी कैंप लगाने की जरूरत, घर बैठे होगी जांच
अभी तक मोतियाबिंद के मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग को शिविर लगाने पड़ते थे। कई बार शारीरिक अक्षमता या जानकारी के अभाव में बुजुर्ग इन कैंपों तक नहीं पहुंच पाते थे। अब आशा कार्यकर्ता घर जाकर स्मार्टफोन से व्यक्ति की आंखों की तस्वीर लेंगी। एआई तकनीक तुरंत उस तस्वीर का विश्लेषण कर मोतियाबिंद की संभावना की पहचान करेगी। यह तकनीक दुर्गम और ग्रामीण इलाकों में नेत्र स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी।
आशा कार्यकर्ताओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण
स्वास्थ्य विभाग इस मुहिम को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दे रहा है। प्रशिक्षण के बाद ये कार्यकर्ता गांवों में जाकर मरीजों को चिह्नित करेंगी और उन्हें अस्पताल रेफर करेंगी।
Iरोशनी एप के माध्यम से समय पर जांच और इलाज संभव होगा, जिससे ग्रामीण इलाकों में मोतियाबिंद के कारण होने वाले अंधेपन पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है।I
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- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओI