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Lucknow News: केजीएमयू में असाध्य कार्ड अब एक साल तक वैध

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केजीएमयू।
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लखनऊ। केजीएमयू प्रशासन ने असाध्य कार्ड की वैधता अवधि तीन साल से घटाकर अब एक साल कर दी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को मुफ्त इलाज मिलने में अड़चन आ रही है। मरीजों को नया कार्ड बनाने के बाद ही मुफ्त इलाज मिल पाएगा। ऐसे में सैकड़ों मरीज पुराने कार्ड को लेकर इधर-उधर भटक रहे हैं।
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केजीएमयू में असाध्य योजना के तहत कैंसर, किडनी और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों का पंजीकरण किया जाता है। योजना के तहत पात्र मरीजों को अस्पताल में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। अभी तक असाध्य कार्ड बनने के बाद इसकी मान्यता तीन साल तक रहती थी। ऐसे में मरीज तीन साल तक बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के योजना का लाभ ले सकते थे।
वहीं, नई व्यवस्था के अनुसार अब कार्ड की वैधता महज एक साल ही रहेगी। केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार, एक साल की अवधि पूरी होने के बाद मरीजों को नवीनीकरण कराना होगा। इसके लिए उन्हें राशन व आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे। कैंसर और किडनी जैसी बीमारियों में मरीजों को लंबे समय तक इलाज, जांच और दवाओं की जरूरत पड़ती है। ऐसे में कार्ड के नवीनीकरण की प्रक्रिया हर साल करने से योजना में गड़बड़ी की आशंका कम होगी। केजीएमयू प्रशासन की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर सभी संबंधित विभागों में नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इसलिए उठाया कदम
हाल ही में यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के मरीजों के इलाज में गड़बड़ी सामने आई थी। असाध्य योजना में पंजीकृत मरीजों को कागजों पर महंगी-महंगी कैंसर, प्रोटीन व आयरन की दवाएं लगाई गईं। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद ही केजीएमयू प्रशासन ने असाध्य योजना के नियमों में बदलाव किया है।
इलाज नहीं मिल पा रहा
लखनऊ के रहने वाले प्रकाश (33) किडनी रोग से ग्रस्त हैं। हर हफ्ते उनकी डायलिसिस संस्थान में मुफ्त में होती थी। बृहस्पतिवार को असाध्य कार्ड के जरिये डायलिसिस कराने पहुंचे तो उन्हें नया कार्ड बनाने के लिए कहा गया। इसके बाद ही डायलिसिस होने की बात कही गई। परिजन पुराना कार्ड लेकर पीआरओ ऑफिस के बाहर खड़े थे। जरूरी दस्तावेज देने के बाद नया कार्ड हफ्ते भर के अंदर बनने की बात कही गई। इस दौरान मरीज की डायलिसिस नहीं हो सकी।
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