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भाषा विवि : सौम्या मिश्रा को मिलेगा चांसलर्स मेडल

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भाषा विवि
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लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय ने अपने 11वें दीक्षांत समारोह के लिए मेधावियों की प्रोविजनल मेडल सूची बृहस्पतिवार को जारी कर दी। इस वर्ष का चांसलर्स गोल्ड मेडल बीटेक बायोटेक्नोलॉजी की टॉपर छात्रा सौम्या मिश्रा को दिया जाएगा। वहीं, वाइस चांसलर्स मेडल के लिए बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा आकाशी यादव का चयन किया गया है। इस बार ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती मेडल बीए अरेबिक के छात्र मोहम्मद अफ्फान को दिया जाएगा।
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भाषा विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक विकास ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि आठ जुलाई को दीक्षांत समारोह में 116 मेधावियों को 125 मेडल दिए जाएंगे। दीक्षांत समारोह में पदक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं की अनंतिम सूची विवि की वेबसाइट kmclu.ac.in पर प्रदर्शित कर दी गई है। इस सूची पर यदि किसी छात्र-छात्रा को आपत्ति हो तो वे अपनी आपत्तियां साक्ष्यों समेत संकायध्यक्ष, विभागाध्यक्ष या प्रभारी निदेशक से अग्रसारित कराकर 15 जून की शाम 5 बजे तक coekmclu.ac.in पर या लिखित रूप से परीक्षा विभाग में दर्ज करा सकते हैं।

एमबीए कर फार्मा क्षेत्र में बनाना है कॅरिअर
फोटो- सौम्या मिश्रा

भाषा विवि में चांसलर्स मेडल के लिए चयनित होने वाली सौम्या मिश्रा इस समय गुड़गांव की एक कंपनी में क्लीनिकल रिसर्च को-ऑर्डिनेटर के पद पर काम कर रही हैं। सौम्या ने बताया कि वह एमबीए करके फार्मा क्षेत्र में कॅरिअर बनाना चाहती हैं। बायोटेक्नोलॉजी से बीटेक करने वाली सौम्या को फैकल्टी और विभाग से भी दो गोल्ड मेडल के लिए चुना गया है। सौम्या के पिता राजकुमार मिश्रा भी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं और मां एएनएम हैं। छोटा भाई भी बीटेक कर रहा है।
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फूड टेक्नोलॉजी में करना है काम

फोटो- आकाशी यादव
वाइस चांसलर्स मेडल के लिए चयनित आकाशी यादव ने बायोटेक्नोलॉजी में बीएससी की है। उन्हें फैकल्टी व विभाग से भी दो गोल्ड मेडल मिले हैं। राजधानी के इटौंजा की निवासी आकाशी का कहना है कि वे फूड टेक्नोलॉजी में कॅरिअर बनाना चाहती हैं। आगे एमएससी के बाद पीएचडी करेंगी। आकाशी के पिता ज्ञानेंद्र यादव का हार्डवेयर का व्यवसाय है और मां गृहिणी हैं। छोटा भाई 12वीं कक्षा में हैं।

पार्टटाइम जॉब के साथ अफ्फान ने की पढ़ाई

फोटो-
भाषा विवि के प्रतिष्ठित ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती मेडल के लिए चयनित मुफ्ती मो. अफ्फान की प्रारंभिक शिक्षा मदरसे में ही हुई। वे बहराइच जिले के निवासी हैं और यहां अमीनाबाद में रहकर पार्टटाइम जॉब के साथ ही पढ़ाई कर रहे हैं। दो बच्चों के पिता अफ्फान ने बताया कि वे ऑनलाइन कक्षाओं के जरिये इस्लामिक शिक्षा को लोगोें तक पहुंचा रहे हैं। उनके पिता भी बहराइच में मदरसे में शिक्षक हैं। अफ्फान ने बताया कि वे आगे भी इस्लामिक शिक्षा में अपना कॅरिअर बनाना चाहते हैं।
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