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UP: अलार्म बजते ही बचने के लिए बंकरों की तरफ भागते हैं... इस्राइल गए युवाओं ने बताई आपबीती, भेजे वीडियो

Tue, 17 Jun 2025 08:50 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, अंबेडकरनगर

सार

इस्राइल में रोजगार के लिए गए युवा मौत के साए में अपने परिजनों के लिए रोजी रोटी का जुगाड़ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सायरन बजते ही उन्हें मिसाइल हमले से बचने के लिए बंकर की तरफ भागना पड़ता है।
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इस्राइल में हो रहे हमले और लोग बंकर में छिपने को मजबूर। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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ईरान से चल रहे युद्ध के बीच रोजगार के लिए इस्राइल गए जिले के युवा मौत के साए के बीच काम करने और रात गुजारने को मजबूर हैं। कुछ मुश्किल भरे हालातों में भी परिवार की गुजर बसर के लिए डटे हुए हैं तो कुछ चाहकर भी वापस नहीं लौट पा रहे हैं। दिन हो या रात कभी भी बमबारी शुरू हो जाती है और कामगारों को भवनों के नीचे बने बंकरों में अलार्म बजते ही शरण लेनी पड़ती है।

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हर कोई बस यही उम्मीद लगाए हुए है कि जल्द ही हालात पहले की तरह सामान्य हों और उनकी रोजी रोटी पर मंडरा रहा खतरा टल जाए ताकि वे अपने परिवार को बेहतर जीवन दे सकें। इन सबके बीच यहां मौजूद परिवार के लोग अपनों के लिए चिंतित हैं। मंगलवार को इस्राइल गए कामगारों से अमर उजाला ने संपर्क किया तो उन्होंने खुलकर अपना दर्द बयां किया।

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आसपास फट रहीं मिसाइलें, काम करने की मजबूरी

इस्राइल गए योगेंद्र व देवानंद। - फोटो : amar ujala
इस्राइल गए अकबरपुर के गांव रोशनगढ़ निवासी देवानंद ने बताया कि वह इस समय तेल अलीव शहर के यहूदा में मौजूद हैं। यहां से दो से ढाई किलोमीटर की दूरी पर काम करने के लिए जाना पड़ता है। देवानंद बताते हैं आज ही एक घंटे पहले ही मिसाइल से हमला हुआ है। ऊपर मंजिल में काम करने के दौरान अक्सर मिसाइलों के गोले आसपास ही फटते हैं। ऐसे में सायरन बजते ही सभी लोगों सुरक्षित स्थान पर पहुंचना पड़ता है। तमाम मुश्किलों के बावजूद रोजी रोटी की खातिर यहीं रुके हैं।

परिजन बोले- काम से ज्यादा जरूरी जीवन है

श्रमिकों ने अपने परिजनों को ग्रुप फोटो भेजी। - फोटो : amar ujala
वहीं, इस युद्ध ने लखनऊ में बहुत से परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। इन परिवारों के युवा इस्राइल में कामगार के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। परिवार चाहता है कि ये जल्द से जल्द घर वापस आ जाएं, लेकिन उड़ानें बंद होने के कारण युवा वहां फंसे हुए हैं।

लखनऊ बीकेटी के रहने वाले अजय चौहान ने बताया कि भाई हरित चौहान बीते एक साल से इस्राइल में हैं। वह घर आना चाहते हैं, लेकिन अभी फ्लाइट का कोई विकल्प नहीं है। रायबरेली के राजेश कुमार भी इस्राइल में कामगार हैं। उनकी माता सावित्री ने बताया कि घर में छोटे-छोटे बच्चे व अन्य सदस्य हैं। काम से भी ज्यादा जरूरी है जीवन। बेटे से जब बात होती है तो वो सब कुछ ठीक और सुरक्षित होने की देता है, लेकिन इसके बावजूद चिंता बनी रहती है।
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पांच हजार से अधिक भारतीय श्रमिक दे रहे सेवा

सेवायोजन विभाग का कहना है कि इस्राइल में पांच हजार से अधिक भारतीय श्रमिक सेवा दे रहे हैं। इतनी ही संख्या में भविष्य में और भेजने की तैयारी है। अधिकारियों ने बताया कि ईरान और इस्राइल के बीच हो रहे हमले की वजह से भारतीय श्रमिकों पर किसी तरह का खतरा नहीं है। सभी सुरक्षित हैं। भारत सरकार हालात पर नजर रखे हुए है। स्थिति बिगड़ी तो श्रमिकों को वापस बुला लिया जाएगा।
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