आजाद हिंद फौज में शामिल हो अंग्रेजों से मोर्चा लेने वाले लेफ्टिनेंट एसके वर्धन (90) का मंगलवार रात 3 बजे अचानक तबियत बिगड़ने से रवींद्र पल्ली स्थित उनके आवास पर देहावसान हो गया।
अचानक सांस फूलने के कारण बेटे उत्पल ने डॉक्टर को बुलाया, लेकिन डॉक्टर के आने से पहले ले. एसके वर्धन ने दम तोड़ दिया। राजकीय सम्मान के साथ बैकुंठधाम में ले. एसके वर्धन का अंतिम संस्कार किया गया।
शहर के कई लोगों ने उनकी मौत पर दुख प्रकट किया है और उनके परिवारीजनों को इस दुख की घड़ी से उबारने की प्रार्थना की।
ले. सुधींद्र कुमार वर्धन का जन्म 11 फरवरी 1924 को सिंगापुर में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर जोगेंद्र कुमार वर्धन सिंगापुर के प्रसिद्ध चिकित्सक थे।
एसके वर्धन जुलाई 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आह्वान पर मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए थे।
वह फौज की आर्टीलरी विंग में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त किए गए थे। वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बेहद करीब रहे। जंगलों में कई दिन बिताते हुए उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ की गई कई कार्रवाई में हिस्सा लिया।
आजादी के बाद नौकरी की तलाश में ले. एसके वर्धन लखनऊ आ गए। यहां वह लगातार 2003 तक चिकित्सा क्षेत्र की कई कंपनियों में काम किया। 17 जून 2005 को कार चलाते हुए उनको हार्ट अटैक पड़ा था।
इसके बाद से बेटे उत्पल उनको कार चलाने से मना कर दिया था। ले. एसके वर्धन नियमों के बहुत पाबंद थे। उत्पल बताते हैं कि उनका खाना खाने, सोने व टहलने और अन्य कामकाज सही समय पर होते थे।