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UP: 'गुरुजी' की बड़ी पहचान, अफसर-नेता रहते नतमस्तक, मंत्री बनवाने तक की डील; एसटीएफ का खुलासा

Mon, 16 Oct 2023 08:21 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

एसटीएफ ने शनिवार शाम विभूतिखंड से दो शातिर ठगों को गिरफ्तार कर गिरोह का राजफाश किया। आरोपी पीएम का सचिव और यूपी सीएम का प्रोटोकॉल अफसर बन ठगी को अंजाम देते थे। अब तक सैकड़ों लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं।
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राम शंकर उर्फ आशीष गुप्ता व अरविंद त्रिपाठी उर्फ गुरूजी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पीएम का सचिव और यूपी सीएम का प्रोटोकॉल अफसर बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह में शामिल अरविंद त्रिपाठी उर्फ गुरुजी की बड़ी पहचान है। कई बड़े अफसर व नेता उसके सामने नतमस्तक रहते थे। इसका फायदा उठाकर वह लोगों को जाल में फंसा लेता था। 
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गिरोह नौकरी व ट्रांसफर पोस्टिंग के अलावा राज्यमंत्री का दर्जा दिलाने से लेकर चेयरमैन व जिलाध्यक्ष बनवाने तक का ठेका लेते थे। एसटीएफ के मुताबिक, अरविंद योग शिविर चलाता था। शिविर में कई बड़े अफसर व नेता शामिल होते थे। ये अफसर व नेता उससे प्रभावित रहते थे। 

एक तरह से वह शिविर का आयोजन इसीलिए करता था, जिससे उसकी पहचान शीर्ष लोगों तक हो सके। जब उनसे बेहतर बातचीत होने लगती थी तो ये उनसे संबंधित काम लेकर आता था। सूत्रों के मुताबिक कई बड़े टेंडर, ट्रांसफर-पोस्टिंग आदि उसने कई लोगों की कराई भी हैं। 
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सबसे बड़ी बात ये है कि इसने कई जिला व ब्लॉक स्तर के नेताओं को भी ठगी का शिकार बनाया। उनको पार्टी में बड़ा पद, यहां तक कि दर्जा प्राप्त मंत्री बनवाने तक खेल करता था। उधर, रामशंकर गुप्ता खुद को कुछ मामलों में विशेष सचिव निवेश भी बताकर रकम ऐंठी।
 
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100 छात्रों से लाखों की रकम वसूली

आरोपियों ने बताया कि हिन्दुस्तान स्काउट एंड गाइड एसोसिएशन की ट्रेनिंग कराने के नाम पर उन्होंने करीब 100 छात्रों के साथ ठगी की। इसमें उन्होंने प्रत्येक छात्र से साढ़े सात हजार रुपये लिए। आशीष के बैंक खाते की डिटेल में इसके सुबूत भी हैं।

कई बड़े दफ्तरों में बिना रोकटोक आते-जाते थे
सूत्रों के मुताबिक, ठगी का गिरोह कई बड़े लोगों की शह पर तैयार किया। कई बड़े विभागों में उसकी गहरी पैठ है। अफसरों से साठगांठ भी है। इसलिए वह उन विभागों में बिना रोक टोक आते-जाते थे। खुफिया इनपुट की मदद से एसटीएफ ने ये कार्रवाई की।
 

कार पर लिखाया उप्र. शासन, सुरक्षाकर्मी भी रखे
आरोपियों के पास से एक कार भी बरामद की। इस पर उत्तर प्रदेश शासन लिखा हुआ है। इस कार के जरिये ही ये लोगों पर रौब गांठते थे। एक दो लोगों को पीआरडी की वर्दी पहनाकर साथ भी रखते थे, जिससे दूसराें को लगे कि ये अफसर हैं और वर्दीधारी उनकी सुरक्षा में तैनात हैं। एसटीएफ के मुताबिक आरोपी अधिकतर लेनदेन कैश में करते थे, जो रकम खाते में लेते थे वह डॉ. आशीष गुप्ता के नाम का खाता होता था। चूंकि ये नाम फर्जी था। असल नाम रामशंकर गुप्ता था।
 

14 आईडी कार्ड मिले
आरोपियों के पास से सीएम के प्रोटोकॉल अधिकारी, विवि के वीसी व सुप्रीम कोर्ट दिल्ली एसोसिएशन समेत 14 आईडी कार्ड मिले हैं। विशेष सचिव निवेश यूपी व विवि वीसी के लेटर हेड, विजिटिंग कार्ड, हिन्दुस्तान स्काउट एंड गाइड से संबंधित कागजात, पीआरडी जवान की वर्दी व बैच, अलग-अलग सरकारी विभाग के फर्जी नियुक्ति पत्र व प्रवेश पत्र और ट्रांसफर पोस्टिंग समेत दर्जनों प्रार्थना पत्र बरामद हुए हैं।
 

सुकरात विवि का वीसी बन बड़ा खेल, चेयरमैन से मिलीभगत का दावा
एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी रामशंकर खुद को सुकरात विवि दिल्ली का वीसी (वाइस चेयरमैन) बताता था। विवि संबंधी कई काम करवाने के नाम पर उगाही करता था। चूंकि विवि के वाइस चेयरमैन का भी नाम आशीष गुप्ता है, इसलिए रामशंकर ने अपना नाम वही रख लिया था।
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एसटीएफ के मुताबिक, आरोपियों ने पीएचडी (आनरेरी डॉक्ट्रेट) डिग्री तमाम लोगों को दिलाई। इसमें चेयरमैन की मिलभगत रही या नहीं इस पहलू पर और जांच की जा रही है।
 
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