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UP: क्या है केजरीवाल की सियासी चाल?

Thu, 20 Mar 2014 01:01 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व भाजपा को धूल चटाने वाली आम आदमी पार्टी (आप) अब यूपी के सहारे लोकसभा चुनाव में सियासत की सीढ़ी चढ़ने जा रही है।
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‘आप’ भी यह जानती है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से ही होकर गुजरता है। यही कारण है कि पार्टी के ज्यादातर बड़े नेता यूपी से ही संसद तक पहुंचने का रास्ता तलाश रहे हैं।

बड़े नेताओं के यूपी आने से ‘आप’ के भी कार्यकर्ताओं में जोश भी नजर आ रहा है। हालांकि, कुछ समर्थक केजरीवाल के वाराणसी से मोदी के खिलाफ लड़ने के फैसले को राजनीतिक आत्महत्या मान रहे हैं।
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इससे अरविंद केजरीवाल को कितना फायदा होगा या फिर कितना नुकसान, यह तो वक्त ही बताएगा।

सबको पता है यूपी की अहमियत

सभी दल अच्छी तरह जानते हैं कि दिल्ली की कुर्सी फतह करने में यूपी की भूमिका अहम होती है। ‘आप’ ने भी इस मंत्र को समझ लिया है।

यही वजह है कि अरविंद केजरीवाल अपने तरकश के बड़े तीरों का इस्तेमाल यूपी में ही कर रहे हैं।

अन्ना के आंदोलनों में उनके साथ साये की तरह रहने वाले कवि से नेता बने कुमार विश्वास को सबसे पहले उन्होंने अमेठी से चुनाव मैदान में उतारा।

‘कोई दिवाना कहता है कोई पागल समझता है...’ कविता के जरिये युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाने वाले विश्वास अमेठी में कांग्र्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से सीधे भिड़ेंगे।

शीला को हरा चुके हैं केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़कर उन्हें हराया था। इस बार उनकी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से टक्कर लेने की तैयारी है।

अरविंद के वाराणसी से चुनाव लड़ने की चर्चा से पार्टी कार्यकर्ताओं में भी गजब का उत्साह है। वाराणसी के जरिये पूरे पूर्वांचल में ‘आप’ अपना माहौल बनाने की कोशिश में है।

पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की सदस्य शाजिया इल्मी गाजियाबाद से चुनाव मैदान में हैं। वह कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर को सीधी टक्कर देंगी।

टीवी पत्रकार से राजनीति में आई शाजिया ने अन्ना के जन लोकपाल आंदोलन के समय प्रवक्ता की भूमिका निभाई थी। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आरकेपुरम सीट से लड़ने वाली शाजिया स्टिंग ऑपरेशन में भी फंसी थीं। वह 326 वोटों से हार गई थीं।

यूपी से ही लड़ रहे 'आप' के 'उस्ताद'

‘आप’ ने राजनीति में सबसे अधिक अनुभव रखने वाले अपने नेता इलियास आजमी को भी लखीमपुर खीरी से मैदान में उतारा है।

‘आप’ की राष्ट्रीय कार्यसमिति व पीएसी के मेंबर इलियास इससे पहले शाहाबाद व हरदोई से दो बार सांसद रह चुके हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते आदर्श शास्त्री भी राजधानी लखनऊ से चुनाव लड़ सकते हैं। आईटी सेक्टर से राजनीति में आए आदर्श युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

उनके लखनऊ से चुनाव लड़ने से यहां का मुकाबला भी दिलचस्प हो जाएगा क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के संसदीय क्षेत्र लखनऊ से खुद भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह चुनाव मैदान में हैं।

कल्बे जव्वाद के नाम पर भी विचार

आम आदमी पार्टी लखनऊ सीट से आदर्श शास्त्री के साथ ही शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद के नाम पर भी विचार कर रही है।

पार्टी इस गुणा-भाग में लगी है कि उसके लिए कौन सा प्रत्याशी ज्यादा फायदेमंद होगा।

यही कारण है कि लखनऊ से आदर्श शास्त्री का नाम तय होने के बावजूद पार्टी ने अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की है।

लखनऊ में शिया समुदाय के वोटरों को देखते हुए पार्टी मौलाना कल्बे जव्वाद को लड़ाने पर भी पूरी गंभीरता से विचार कर रही है। जल्दी ही इस पर निर्णय होने की उम्मीद है।
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अब 25 को होगी वाराणसी में रैली

‘आप’ की वाराणसी रैली अब 25 मार्च को होगी। पहले यह रैली 23 मार्च को होनी थी लेकिन इसी दिन विधान परिषद की स्नातक व शिक्षक सीट के चुनाव होने हैं।

इस कारण रैली के लिए इजाजत नहीं मिली। इसी रैली में अरविंद केजरीवाल वाराणसी से चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं।

इससे पहले वह यहां की जनता से चुनाव लड़ने के संबंध में रायशुमारी करेंगे।
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