संघर्ष के जज्बे की मिसाल हैं अमर उजाला रूपायन अचीवर अवार्ड्स -2013 की ब्रांड एंबेसडर अरुणिमा सिन्हा।
चलती ट्रेन से फेंका जाना और उसमें पैर गंवाना किसी के भी जीवन की सबसे बड़ी घटना हो सकती थी लेकिन अरुणिमा जैसी जीवट वाली यूथ आइकॉन के लिए नहीं।
उन्होंने माउंट एवरेस्ट को फतह किया और दुनिया को बताया कि उनके जीवन में सबसे बड़ी घटना यह है। बरेली के निकट ट्रेन से फेंके जाने के बाद आरुणिमा सात घंटे वहां तड़पती रहीं।
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इस दौरान 49 ट्रेनें वहां से गुजरीं। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका एक पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा। इन हालात में भी अरुणिमा ने हार नहीं मानी और दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह किया।
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अब वे अपनी शारीरिक चुनौतियों से उबरकर ब्लेड रनर के रूप में मशहूर हुए ऑस्कर प्रिस्टोरिअस की तरह ही अपने लिए ब्लेड लैग बनवा रही हैं। वे पैरा-ओलंपिक्स में देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करने का लक्ष्य बना चुकी हैं।
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