कला लोगों को जोड़ती है। विश्व में भारत की पहचान भी कला से है। भारत में कला का इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है। हमारे देश में 64 कलाएं विद्यमान हैं। इस गौरवशाली परंपरा को आज भी गुफाओं में देखा जा सकता है। यूपी और महाराष्ट्र को कला ही एक सूत्र में पिरोती है। यह चित्रकला कार्यशाला महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को एक-दूसरे के और करीब लाने का प्रयास है। कलाकारों ने चित्रों में राजभवन के अनूठे रंगों को उभारा है।
यह कहना है राज्यपाल राम नाईक का, जो सोमवार को राजभवन में गत छह जून से चल रही पांच दिवसीय चित्रकला कार्यशाला के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कार्यशाला का आयोजन ललित कला अकादमी, राष्ट्रीय कला संस्थान व संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। इस मौके पर कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि 22 जुलाई, 2014 को जब राज्यपाल के पद की शपथ ली थी तो राजभवन के दरवाजे सभी के लिए खोल दिए और उसे लोकभवन बनाने का प्रयास किया। इन पांच सालों में तीस हजार से अधिक लोगों से भेंट की। उन्होंने कहा कि राजभवन की सुंदरता चित्रों के माध्यम से और सुंदर होकर बाहर आई है।
नाईक ने कहा कि कलाकारों ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच सेतु का काम किया। मुंबई को आर्थिक राजधानी बनाने में उत्तर भारतीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। भगवान रामचंद्र ने अयोध्या से वनवास प्रस्थान पर महाराष्ट्र की पंचवटी को चुना था।
ऐसे ही छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक काशी के विद्वान गागा भट्ट ने किया था। 1857 में स्वतंत्रता संग्राम उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ, लेकिन रानी लक्ष्मीबाई, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जैसे महानुभाव ऐसे थे, जिनका संबंध महाराष्ट्र से था।
इस मौके पर महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि कलाकारों ने चित्रों को मोती की तरह चुनकर माला में पिरोया है। समारोह में राज्यपाल की पत्नी कुंदा नाईक, अपर मुख्य सचिव हेमंत राव, पद्मश्री बाबा योगेंद्र, संस्कार भारती के संगठन मंत्री गिरीश चंद्र, ललित कला अकादमी के धर्मसिंह सहित कई कलाकार उपस्थित रहे।