उन्होंने कहा कि पराली न जलाये जाने के संबंध में किसानों को जागरूक किया जाये। साथ ही पराली जलाने से होने वाले कुप्रभावों के सम्बन्ध में जानकारी किसानों को दी जाये। पराली को खेत की मिट्टी में मिलाकर कम्पोस्टिंग हेतु अपेक्षित व्यवस्थायें सुनिश्चित करायी जाये।
निर्माण स्थलों के आस-पास धूल इत्यादि के नियंत्रण हेतु नियमित पानी के छिड़काव आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करायी जाये। सड़क निर्माण के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाये कि धूल न उड़े तथा जहां मिट्टी के ढेर हैं वहां पानी के छिड़काव की नियमित व्यवस्था की जाये। उन्होंने कहा कि प्रदूषण उत्पन्न करने वाले अन्य सभी स्रोतों पर भी अपेक्षित कार्यवाही की जाये।