10वां सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। सेना में जुगाड़ से काम नहीं होते। लेकिन आम जिंदगी में काम जुगाड़ से होते हैं। ऐसे में जब सैन्यकर्मी सेवानिवृत्त होकर आम जनजीवन में पहुंचते हैं तो उन्हें गुस्सा आता है। जोकि स्वाभाविक है। ऐसे में सेवानिवृत्त सैनिकों की समस्याओं को समझते हुए शासन-प्रशासन, अधिकारियों व आम लोगों को उनका सहयोग करना चाहिए।
यह कहना है केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल का। वह बुधवार को छावनी स्थित सूर्या ऑडिटोरियम में मुख्यालय मध्य उत्तर प्रदेश सब एरिया की ओर से 10वें सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहाकि जो लोग हड़ताल के माध्यम से अपनी बात नहीं कहते। उनके बारे में कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका को सोचना चाहिए। यूपी सरकार शहीद होने पर उनके परिजनों को 50 लाख देती है। उन्होंने यह भी कहाकि शहीदों की पत्नियों को गैस, पेट्रोल पंप पत्नियों को मिला। लेकिन शहीद के मां बाप को कुछ नहीं मिलता। यह अच्छी बात है कि प्रदेश सरकार 30 प्रतिशत धनराशि मां-बाप को देती है। इस अवसर पर सम्मान स्मारिका का विमोचन भी किया गया। उन्होंने पूर्व सैनिकों से संवाद किया और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को नमन किया। कार्यक्रम में मध्य कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा, सामाजिक कल्याण एवं सैनिक कल्याण के अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वर लु सहित 700 से अधिक पूर्व सैनिकों एवं वीर नारियों ने हिस्सा लिया। सम्मान और सराहना के प्रतीक स्वरूप सभी पूर्व सैनिकों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
लगे स्टॉल, दी गई जानकारी
कार्यक्रम स्थल पर पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए स्टॉल भी लगाए गए थे। जहां शिकायत निवारण काउंटर, भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना(ईसीएचएस) सहायता डेस्क, चिकित्सीय परीक्षण सुविधाएं तथा कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित स्टॉल थे। उप्र पूर्व सैनिक कल्याण निगम की ओर से एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जो पूर्व सैनिकों के पुनर्वास, कल्याण एवं सशक्तिकरण से जुड़ी वर्तमान पहल व भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित थी।
आम जनजीवन में सेवानिवृत्त सैनिकों की करें हरसंभव मदद
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