कहते हैं कि कभी-कभी किसी की तारीफ भी खतरनाक हो जाती है। यही भाजपा में हुआ। पता नहीं संचालक महोदय की जुबान फिसली या दिल की बात जुबान पर आ गई।
पर, उन्होंने जो कुछ कहा,उसके बाद कार्यक्रम के आयोजकों के पास सिर पीटने के अलावा और कुछ नहीं बचा। वाकया भाजपा के व्यापारी सम्मेलन का है।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे साहब को पता नहीं क्या सूझा कि उन्होंने आने वाले लोकसभा चुनाव की तुलना महाभारत के युद्ध से शुरू कर दी।
बोले, आने वाला चुनाव धर्मयुद्ध है। धर्म के पक्ष में पांडव अर्थात भाजपा खड़ी है। कौरव के रूप में भाजपा विरोधी दल मैदान में जुटे हैं। इस युद्ध में राजनाथ सिंह को सारथी की भूमिका निभानी है।
संचालक महोदय बोलते जा रहे थे और मंच से लेकर नीचे कुर्सियों तक पर बैठे लोग अपनी अंगुली को दांतों के नीचे दबा रहे थे कि वह जो देख रहे हैं, कहीं सपना तो नहीं है। जो काम अभी तक संगठन नहीं कर पाया है, उसे संचालक महोदय साफ किए दे रहे हैं।