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Lucknow News: 2884 करोड़ रुपये के ऋण की मिली अनुमति, अब रफ्तार पकड़ेगा मेट्रो का सेकेंड फेज

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लखनऊ मेट्रो।
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लखनऊ। चारबाग से बसंतकुंज के बीच प्रस्तावित लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) से लगभग 2,884 करोड़ रुपये के ऋण की अनुमति दे दी है। इस मंजूरी के बाद अब कॉरिडोर के सात भूमिगत स्टेशनों के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
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इस कॉरिडोर के निर्माण पर लगभग 5,801 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कुल लागत का लगभग 50% हिस्सा (2,900 करोड़ रुपये) केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगे, जबकि शेष राशि एनडीबी से ऋण के रूप में ली जाएगी। प्रदेश सरकार ने मेट्रो के दूसरे फेज के लिए पहले ही 550 करोड़ रुपये का प्रावधान कर दिया है। इस पूरे कॉरिडोर को अगले 5 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रस्तावित कॉरिडोर में सात भूमिगत स्टेशनों के निर्माण पर करीब 2,100 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। आर्थिक कार्य विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में नीति आयोग और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की मौजूदगी में यूपी मेट्रो के एमडी सुशील कुमार ने परियोजना का वित्तीय खाका पेश किया, जिसे हरी झंडी मिल गई है।
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पहली बार ब्रिक्स बैंक से मिलेगा कर्ज

खास बात यह है कि लखनऊ, कानपुर, आगरा में अब तक की मेट्रो परियोजनाओं के लिए यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक से ऋण लिया जाता था। यह पहली बार है जब यूपी मेट्रो ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) द्वारा स्थापित एनडीबी से वित्तीय सहायता ले रहा है।
150 करोड़ से बनेगा बसंतकुंज डिपो
लखनऊ मेट्रो के सेकेंड फेज में 150 करोड़ रुपये से बसंतकुंज डिपो का निर्माण कार्य कराया जाएगा। इसके लिए टेंडर किया जा चुका है। जो एक से डेढ़ महीने में फाइनल हो जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि अप्रैल से निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
12 किमी लंबे ट्रैक पर होंगे सात भूमिगत, पांच एलिवेटेड स्टेशन
लखनऊ मेट्रो के चारबाग-बसंतकुंज कॉरिडोर 12 किमी लंबा होगा। इसमें सात भूमिगत गौतमबुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पांडेयगंज, सिटी रेलवे स्टेशन, मेडिकल चौराहा और चौक तथा पांच एलिवेटेड ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, मूसाबाग और बसंतकुंज होंगे। पांच वर्षों में प्रोजेक्ट पूरा किया जाना है। एलिवेटेड स्टेशनों के निर्माण का टेंडर हो चुका है। पांच एलिवेटेड स्टेशन बनने हैं, जिनका टेंडर पंद्रह दिन में फाइनल हो जाएगा तथा दो महीने में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसी क्रम में सात अंडरग्राउंड स्टेशनों के निर्माण के लिए टेंडर डेढ़ महीने बाद जारी किया जाएगा।
Iईस्ट–वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर से लखनऊ शहर में आवागमन और अधिक सुगम होगा। लाखों यात्रियों को लाभ मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। I
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I-सुशील कुमार, एमडी, यूपी मेट्रोI
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