सूबे में कुछ राज्य मंत्रियों के पास कोई काम नहीं है। कुछ तो ऐसे भी हैं, जिन्हें महकमा तो मिल गया लेकिन आकाओं ने काम नहीं दिया।
ऐसे ही एक युवा माननीय हैं जो मंत्री तो बन गए लेकिन काम धेले भर का नहीं मिला। सूबे के मुखिया ने वफादारी के ईनाम में लाल बत्ती देकर अपने ही एक विभाग से जोड़ भी लिया।
मंत्री बने भी कई महीने बीत गए, लेकिन एक भी फाइल उन तक नहीं पहुंची....
बेचारे मंत्री जी ऑफिस तो इस आस में आते हैं कि शायद आज कोई फाइल आ जाए और उसमें चिड़िया बैठाने का मौका मिल जाए। काम न मिलने से अफसर भी माननीय से वैसा ही व्यवहार कर रहे हैं।