शासन ने राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों में तैनात संविदा शिक्षकों की नियुक्ति को निरस्त कर दिया है। अपर मुख्य सचिव आयुष प्रशांत त्रिवेदी ने शिक्षकों के रिक्त पदों को संविदा के आधार पर भरने के 11 अप्रैल 2018 के शासनादेश को निरस्त कर दिया है।
इसकी जानकारी होम्योपैथी निदेशालय को दे दी गई है। संविदा शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार की खबर अमर उजाला ने 24 जुलाई को प्रकाशित की थी। प्रदेश में राजकीय मेडिकल कॉलेजों में लगभग 200 संविदा शिक्षकों की भर्ती के मामले में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की शिकायत शासन स्तर पर की गई थी। इस मामले में लंबे समय से जांच चल रही थी और पूरा मामला शासन स्तर पर अटका हुआ था। अपर मुख्य सचिव आयुष प्रशांत त्रिवेदी ने आखिरकार शिक्षकों की नियुक्ति को निरस्त कर दिया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में हुई संविदा शिक्षकों की नियुक्ति में धांधली के आरोप लगे थे। खासतौर से कम समय से हजारों शिक्षकों के इंटरव्यू को लेकर उंगलियां उठीं थीं। इसके बाद 2019 में बिना शासन की अनुमति में पूर्व निदेशक होम्योपैथी प्रो. वीके विमल ने सभी संविदा शिक्षकों की नियुक्ति का नवीनीकरण कर दिया था।
निदेशक होम्योपैथी के खिलाफ बैठा दी गई जांच
इस मामले की शिकायत जब शासन स्तर पर की गई तो निदेशक होम्योपैथी को हटा दिया गया और उनके खिलाफ जांच भी बैठा दी गई थी। प्रदेश में इस समय फैजाबाद, इलाहाबाद, आजमगढ़, लखनऊ, मुरादाबाद, गाजीपुर, कानपुर, अलीगढ़ व गोरखपुर में राजकीय होम्योपैथिक मेेडिकल कॉलेज हैं।
इनमें से अलीगढ़ व गोरखपुर को 2019-20 सत्र में ही प्रवेश की अनुमति केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद और आयुष मंत्रालय ने दी है। अब इन मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती के लिए फिर से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी। क्योंकि सभी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। इसके चलते कॉलेजों की मान्यता भी संकट में फंस जाएगी।