राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 'अमर उजाला' की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत आयोजित कार्यक्रम संवाद में अलग-अलग क्षेत्र की प्रतिष्ठित महिलाओं ने हिस्सा लिया और अपने जीवन के अनुभव बताते हुए बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की शुरूआत प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्वलन कर की। इस दौरान उनके साथ मंच पर अमर उजाला के कार्यकारी संपादक डॉ इंदुशेखर पंचोली भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी ने अपने भाषण में केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा बेटियों की तरक्की के लिए चलाई जा रही योजनाओं का जिक्र किया और कहा कि आज उज्ज्वला योजना से महिलाओं का जीवन आसान हुआ है तो स्वच्छ भारत अभियान के तहत बने शौचालय से उनके सम्मान की रक्षा हुई है।
उन्होंने कहा कि केंद्र व प्रदेश की सरकार बेटियों की तरक्की के लिए प्रतिबद्घ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए जो उपहार मिले थे। उनमें से 60 करोड़ रुपये उन्होंने बेटियों की शिक्षा के लिए दान कर दिए और जब प्रधानमंत्री बने तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान शुरू कर बेटियों को तरक्की के नए अवसर खोले।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यूपी में पिछले दो वर्षों में 90 हजार प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प किया गया। जिन स्कूलों में बच्चे कम थे उन्हें बंद नहीं किया गया बल्कि वहां की साफ-सफाई कर उन्हें बेहतर बनाया गया जिससे बच्चों का ड्रॉप आउट रेट कम हुआ। योगी ने कहा कि कई बार ऐसा होता है कि लोग बेटों को तो अच्छे स्कूल में पढ़ाते हैं लेकिन बेटियों को सरकारी स्कूल में भेजते हैं। ऐसा न हो इसलिए प्राथमिक स्कूलों की हालत सुधारने का काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बेटियों के सवालों का भी दिया जवाब
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आयुषी पटेल का सवाल : अयोध्या में राममंदिर कब बनेगा? (आयुषी पटेल)
मुख्यमंत्री ने दिया जवाब : आपकी भावनाओं का हम सम्मान करते हैं। अवश्य ही यह काम होगा।
साक्षी रासन्या ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आरक्षण के कारण प्रतिभाएं पीछे रह जाती हैं। इस पर आपका क्या विचार है?
जवाब : कोई बच्चा पढ़ाई में कमजोर होता है, तो उसे पढ़ाने के लिए घर पर मां-बाप ट्यूटर लगाते हैं। सर्व समावेशी विकास के लिए आरक्षण जरूरी है। अब तो आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के परिवारों के लिए भी 10 फीसदी आरक्षण लागू कर दिया गया है। परिश्रम करें तो प्रतिभा कभी पीछे नहीं रह सकती।
साक्षी श्रीवास्तव ने सवाल किया कि स्कूल स्तर पर लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग क्यों नहीं दी जाती है?
जवाब : ये अच्छा सवाल है। प्राथमिक शिक्षा के स्तर से ही इस तरह के नैतिक मूल्य दिए जाने चाहिए जिससे कि लड़के लड़कियों का सम्मान करना सीखें। सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग जरूरी है। इस दिशा में प्रयास भी शुरू किए गए हैं। यूपी में पिंक बस सेवा शुरू की है, जिसकी परिचालक महिला होगी। बस में पैनिक बटन भी है। बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार संवेदनशील भी है और प्रतिबद्ध भी।
मनीषा पांडे ने पूछा, आरक्षण की वजह से काफी दिक्कत है। एससी-एसटी की पूरी फीस माफ होती है, पर हमारी क्यों नहीं?
जवाब : हमने सभी के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था की है। जो सामाजिक व आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें बराबरी पर लाने के लिए सुविधाएं देना जरूरी है। वरना, राष्ट्र का समुचित विकास नहीं हो सकेगा। हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। आज नौकरियों की कहां कमी है। पहले सिर्फ एक इलेक्ट्रॉनिक चैनल होते थे, आज आप गिन नहीं सकते। वहां नौकरी की संभावनाएं हैं। सोशल मीडिया के क्षेत्र में भी काफी संभावनाएं हैं। फेसबुक का उदाहरण हमारे सामने है। हां, छात्रवृत्ति पाने के लिए न्यूनतम निर्धारित अंक तो लाने होंगे।
खुशब जायसवाल ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रैक्टिल क्लास की भी समुचित व्यवस्था होनी चाहिए?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जवाब दिया कि इसके लिए ही पीएम स्किल डेवलेपमेंट प्रोग्राम शुरू किया गया है। स्कूलों में भी स्किल डेवलेपमेंट मिशन शुरू होना चाहिए। अभी तक 8 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 5 लाख को रोजगार भी मिल चुका है।
पहलवान साक्षी मलिक ने बताया, जैसे ही मेडल जीता सबका नजरिया बदल गया
कार्यक्रम में पहलवान नवजोत कौर व साक्षी मलिक।
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कार्यक्रम में बेटियों को संबोधित करते हुए ओलंपिक पदक विजेता पहलवान साक्षी मलिक ने कहा कि कोई भी नहीं चाहता था कि मैं कुश्ती करूं। बस माता-पिता ने कहा कि तुम जो करना चाहती हो करो। मैं दिन रात बस यही सपना देखती थी कि ओलंपिक में मेडल जीतूं। फिर जैसे ही मैंने मेडल जीता सबका नजरिया बदल गया। साक्षी ने कहा कि बेटा चाहे कुछ भी न करे तो भी उसे घर में सबका प्यार मिलता है जबकि लड़कियों के बारे में ऐसा नहीं है।
वहीं, पहलवान नवजोत कौर ने कहा कि गांव में कुश्ती करना एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। अगर परिवार साथ न होता तो शायद आज मैं यहां न होती। मैं स्कूल और प्रैक्टिस के लिए पूरे दिन घर से बाहर रहती थी तो लोग बहुत अजीब बातें करते थे, पर पापा ने हमेशा मेरा साथ दिया।
'फेमिनिस्ट होने का मतलब लड़कों से लड़ना नहीं'
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आईएएस कामिनी चौहान रतन ने बेटियों को बताया कि फेमनिस्ट होने का मतलब यह नहीं आपको लड़कों से लड़ना है। इसका मतलब है कि आपको लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सामाज में बदलाव लाना है।
रचना गोविल ने कहा कि जब मैंने धावक बनने का फैसला लिया तो घर पर यह बात किसी को भी पसंद नहीं आई। मैंने पिता से अपने लिए जूते खरीदने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया फिर एक बार वह मुझे दौड़ता देखने आए। तब लोगों ने मेरे पिता को मेरे नाम से जाना और उस दिन उनको मेरे ऊपर बहुत गर्व हुआ।
हैंडबॉल खिलाड़ी मंजुला पाठक ने कहा कि हम सबको पहले यह तय करना होता है कि हम जीवन में क्या बनेंगे। एक बार यह तय कर लिया तो बिना उसे पाए नहीं रुकना है।
वेट लिफ्टर सत्येंद्रीश्वरी ने बताया कि सफल बनने के लिए अपनों का साथ बहुत जरूरी है। पहले मुझे मेरे पिता ने सपोर्ट किया इसके बाद पति ने। ग्रेजुएशन में ही मेरी शादी हो गई लेकिन पति ने मेरे सपनों को पूरा करने को लिए सहयोग किया। मेरी ज्यादातर उपलब्धियां शादी के बाद आईं।
साध्वी निरंजन ज्योति बोलीं, अगर ठान लो तो गगन के तारे तोड़ सकती हो
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्योग राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति
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केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि बेटियों को न झिझकने की जरूरत है और न ठिठकने की। बेटियों और बहनों अगर तुम ठान लो तो गगन के तारे तोड़ सकती हो। आखिर किस मामले में हम पुरुषों से कम हैं जो खुद को कमजोर समझें। नारी के बिना सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती। तब भी हम खुद को हेय समझें यह ठीक नहीं। आगे बढ़ोगी तो समाज की निगाह खुद ब खुद बदल जाएगी। पहले रोकने और टोकने वाले पीठ ठोकने लगेंगे।
उन्होंने कहा कि बेटियों को चाहिए कि वह अपने भीतर हीनता नहीं बल्कि श्रेष्ठता का एहसास पालें। आखिर पुरुषों ने ही नाम नहीं कमाया है। वीरता, अध्यात्म, खेल, सेना और परिवार की देखरेख में महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘बहनों अपनी शक्ति जगाकर जुट जाओ निर्माण में, संस्कृति का सौभाग्य छिपा है, नारी के उत्थान में।’
साध्वी निरंजन ज्योति ने संवाद में आई बेटियों के अंदर हौसला भरते हुए कहा, हमारे अंदर कौन सी काबिलियत नहीं है। मैं तो कहतीं हूं कि हमारे अंदर वह विशेषता है जो पुरुषों में नहीं है। बच्चे को जन्म हम देते हैं। उसे नौ महीने गर्भ में रखने की क्षमता हममे है। बच्चे को अच्छी शिक्षा देने का काम भी मातृ शक्ति ही कर सकती है। लोग कहते हैं कि पुरुषों का जमाना है। पर, केंद्र सरकार में रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय महिलाओं के हाथ में हैं। इससे साबित होता है कि कोई भी काम ऐसा नहीं है जिसे महिला नहीं कर सकती।
'पुरुष में दृष्टि तो महिला में अंतरदृष्टि होती है'
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल
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बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा, ‘महिलाओं में विशेष बात होती है। पुरुषों में दृष्टि होती है तो महिलाओं में अंतर्दृष्टि होती है। श्रीरामचंद्र को भी सीता ने शक्ति दी थी। भगवान कृष्ण को राधा ने शक्ति दी थी। जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो कहा जाता है कि कुछ तो जरूर होगा इसमें...। सही है, कुछ तो है हममें जो घर-परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए आगे बढ़ीं।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों और संस्कृति में नारी को हर रूप में श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री महिला भी रह चुकी हैं। कई बार रही हैं। पर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो वर्ष में महिला सशक्तीकरण के लिए जितना काम किया है, वह बेमिसाल है।
बेटियां कमजोर नहीं होतीं
अनुपमा ने कहा, बेटियों ने अपनी मेहनत से यह मिथक तो बहुत पहले ही तोड़ दिया है कि वे कमजोर होती हैं। उन्होंने बेटियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि
मत रोको, उसे गिरने दो, मत थामो, उसे बढ़ने दो
एक दिन आसमां को भी छू लेगी, बस थोड़ा उड़ने तो दो।
रुक-रुक कर चलना, गिर-गिर कर संभलना,
इसी तरह धीरे से एक दिन अपने आसुंओं को पोंछकर आसमां की बुलंदियों को छू लेना
यही है नारी शक्ति की कहानी।
'अगर रामायण में सीता न होतीं तो रामयण न होती'
'रामायण' में माता सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया
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इसके पहले रामानंद के सीरियल 'रामायण' में माता सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया ने अपने संबोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए अपराजिता एक शानदार प्रयास है। महिलाओं की समाज में हमेशा ही इज्जत होनी चाहिए। अगर रामायण में सीता न होती तो रामायण भी न होती।
उन्होंने कहा कि एक कहावत है कि एक सफल आदमी के पीछे एक महिला का हाथ होता है जबकि ये भी एक सच है कि एक सफल महिला की सफलता के पीछे भी एक सफल महिला का ही हाथ होता है।
दीपिका ने लखनऊ शहर की तारीफ की और ऑडियंस से कहा कि आप सभी बेहद लकी हैं जो इतने खूबसूरत शहर में रहते हैं।
जो काम पुरुष रक्षामंत्री नहीं कर पाए वो महिला रक्षामंत्री ने कर दिखाया
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल
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अपराजिता अमर उजाला की एक बेहतरीन पहल है। हम नारी शक्ति को प्रणाम करते हैं। हमारे मंत्रिमंडल में ज्यादातर काम महिलाएं ही संभाल रही हैं। आप ज्यादा दूर न जाएं तो हमारे देश की रक्षा मंत्री भी एक महिला है, निर्मला सीतारमण ने वह कर दिखाया है जो पुरुष नहीं कर पाए। उनके रक्षामंत्री रहते हुए ही पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया गया है।
अनुप्रिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं की बेहतरी के लिए कई प्रयास किए। बेटियां शिक्षित हों इसके लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चलाया जा रहा है। खुले में शौच बंद करने के लिए शौचालयों का निर्माण कराया गया। मैटरनिटी लीव की अवधि बढ़ाई गई। लक्षय अभियान से मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य में सुधार लाया गया है। सरकार ने अपने प्रयासों से यह सुनिश्चित किया कि महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार हो। अनुप्रिया ने कहा कि महिलाओं को अपने अस्तित्व से प्यार करना सीखना होगा और अपनी शक्ति का एहसास दुनिया को कराना होगा।
उन्होंने कहा कि मैं अपने दिल में महसूस करती हूं कि मजबूत महिलाएं एक दूसरे का सहारा बनती हैं। एक आदमी कामयाब होता है तो कहा जाता है कि वह काबिल है। वहीं, जब एक औरत कामयाब होती है तो कहा जाता है कि कुछ तो कारण होगा। यह मानसिकता हमे बदलनी होगी। कभी भी किसी लड़की की जिंदगी आसान नहीं होती। लोगबेटियों को तो खूब समझाते हैं पर लड़कों को समझाना भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां कठिन परिश्रम करें तो उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।