आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि विधेयक में यह भी शामिल किया जाए कि पुलिस को बालकों, बेटियों और महिलाओं से जुड़े यौन अपराध के मामलों में 24 से 48 घंटे में आरोपी को गिरफ्तार करना होगा। आरोपी गिरफ्तार नहीं होने के कारण ही अग्रिम जमानत का प्रयास करता है या पीड़ित व्यक्ति को डराने धमकाने की कोशिश करता है।
उत्तर प्रदेश में बालिकों के साथ कुकर्म, बेटियों और महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों में अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी। विधानमंडल के दोनों सदनों में शुक्रवार को दंड प्रक्रिया संहिता (उत्तर प्रदेश संशोधन ) विधेयक 2022 पारित किया गया।
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संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 438 की उपराधा 6 में अग्रिम जमानत का प्रावधान है। संशोधित विधेयक में इसका प्रावधान समाप्त किया है। उन्होंने बताया कि बेटियों और महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 376क, 376कख, 376 ख, 376 ग, 376 घ, 376 घक, 376 घख, और 376ड में बलात्कार और अवैध मैधुन के मामलों में अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी।
प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव खारिज
कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा मोना और बसपा विधायक दल के नेता उमाशंकर सिंह ने दंड प्रक्रिया संहिता (उत्तर प्रदेश संशोधन ) विधेयक 2022 प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा। आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि विधेयक में यह भी शामिल किया जाए कि पुलिस को बालकों, बेटियों और महिलाओं से जुड़े यौन अपराध के मामलों में 24 से 48 घंटे में आरोपी को गिरफ्तार करना होगा। उन्होंने कहा कि आरोपी गिरफ्तार नहीं होने के कारण ही अग्रिम जमानत का प्रयास करता है या पीड़ित व्यक्ति को डराने धमकाने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि इन्हीं कारणों से यूपी महिला अपराध में पहले स्थान पर है।
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संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि एनसीआरबी के रिकार्ड के अनुसार महिलाओं से जुडे अपराध में अपराधियों को सजा दिलाने में यूपी पहले नंबर पर है। 7713 मामलों में सजा दिलाई गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ सख्त कार्रवाई करती है। विधेयक प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव निरस्त किया गया।